सोनम वांगचुक की रासुका गिरफ्तारी का विरोध, लद्दाख को राज्य और छठी अनुसूची की मांग फिर जोर पकड़ने लगी

Sep 30, 2025 - 20:22
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सोनम वांगचुक की रासुका गिरफ्तारी का विरोध, लद्दाख को राज्य और छठी अनुसूची की मांग फिर जोर पकड़ने लगी

नई दिल्ली (आरएनआई) नई दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत गिरफ्तारी और पाकिस्तान से जोड़े जाने के आरोपों का कड़ा विरोध किया गया। करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (लद्दाख) के सज्जाद करगिल ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया और वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग की।

सज्जाद ने कहा कि लद्दाख के लोगों ने सीमाओं की रक्षा के लिए अपने खून का बलिदान दिया है और उनका कोई ऐसा इतिहास नहीं है कि वे पाकिस्तान से जुड़े किसी गतिविधि में शामिल हों। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई लोग पाकिस्तान जाते रहते हैं, जैसे क्रिकेट टूर्नामेंट या अन्य आयोजनों में, लेकिन उन पर एनएसए नहीं लगाया जाता।

प्रेस वार्ता में अतुल सती (जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति), मानसी अशर (हिमधारा कलेक्टिव) और अनमोल ओहरी (क्लाइमेट फ्रंट, जम्मू) ने भी हिस्सा लिया। अतुल सती ने कहा कि पिछले 10-11 सालों में आंदोलन कर रहे लोगों पर सरकार लगातार ठप्पा लगा रही है, जैसे जोशीमठ में आंदोलन पर चीन का एजेंट और माओवादी कह देना। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पर्यावरण और धरती को बचाने के लिए किया जा रहा है।

वक्ताओं ने इस गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध की आज़ादी पर हमला बताया और कहा कि यह लद्दाखी लोगों की आवाज़ को दबाने का प्रयास है।

मांगें
सज्जाद करगिल ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगें हैं:

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।

लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।

ध्यान रहे कि सोनम वांगचुक ने इसी मांग के लिए 35 दिन की भूख हड़ताल शुरू की थी। इस हड़ताल के 15वें दिन यानी 25 सितंबर को लेह में हिंसा भड़क गई थी और चार लोगों की मौत हुई थी। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने द वायर से कहा कि वांगचुक गांधीवादी तरीके से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे और हिंसा युवाओं ने नहीं, बल्कि केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल ने शुरू की थी।

सरकार पर आरोप
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार चाहती है कि उनके नियुक्त अधिकारी शासन करें और लद्दाख के लोग केवल खेलों और उत्सव में व्यस्त रहें, नीति निर्माण से दूर रहें। सज्जाद ने कहा कि यूनियन टेरिटरी का मॉडल लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतरा और इसलिए उन्हें पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची का दर्जा मिलना चाहिए।

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