सेवा भारती ने स्वास्थ सेवारत वाल्मीक समाज जनों को सम्मानित कर मनाई वाल्मीक जयंती
गुना (आरएनआई) मंगलवार को पूरे देश भर में महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है. इसी के साथ ही आज सेवा भारती गुना द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत सामाजिक समरसता को ध्यान में रखते हुए जिला चिकित्सालय में सेवारत वाल्मीक समाज जनों को सम्मानित किया एवं मरीजों के अटेंडरों को भोजन कराकर बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ वाल्मीक जयंती मनाई गई। इस अवसर पर सेवा भारती डॉ रामवीर सिंह रघुवंशी, सचिव अखलेश विजय वर्गीय, सेवा भारती विभाग समन्वयक प्रमोद यादव, भाजपा नेता रमेश मालवीय एवं एकल सचिव विकास जैन सहित सेवा भारती के सदस्यों ने सर्व प्रथम महर्षि वाल्मीक जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर उन्हें नमन किया। तत्पश्चात जिला चिकित्सालय गुना में सेवारत श्रीमती मायावाई करोसिया, रामबाबू मालवीय, राजकुमार घेघट, शंभू दयाल मालवीय, गिर्राज धौलपुरिया एवं राजू करोसिया का सेवा भारती परिवार ने साल श्रीफल एवं माल्यार्पण कर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर भंवर लाल पंत, काशी राम उरैया, फणींद्र चक्रवर्ती सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित रहे। जयंती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मालवीय ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा महान ग्रंथ रामायण में बतायी गई शिक्षाएं समाज में सभी के लिए समान अवसर, भेदभाव रहित जीवन जीने और बुराई के खिलाफ एकजुट का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कुंभ में हमारे सफाई वीरों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लिया ये गर्व की बात हे।
वाल्मीकि का असली नाम ‘रत्नाकर’ था. वे पहले एक लुटेरे के रूप में जीवन जीते थे. एक बार उन्होंने देवर्षि नारद को लूटने की कोशिश की, तब नारद मुनि ने उनसे पूछा — क्या तुम्हारा परिवार तुम्हारे पापों का फल भोगने को तैयार है? जब रत्नाकर ने अपने परिवार से यह प्रश्न किया, तो किसी ने भी पाप का भार साझा करने से इनकार कर दिया. इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी.। सेवा भारती अध्यक्ष डॉ रघुवंशी ने कहा कि महर्षि वाल्मीक एक चिकित्सक थे उन्होंने उस जमाने में माता सीता को अपनी कुटिया में रखा और वहीं लब ओर कुश का जन्म कराया और उन्हें शिक्षित कर आत्म निर्भर बनाया।
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