‘सीबीआई जांच का आदेश वापस लें, SIT जांच को मंजूरी दें’: तमिलनाडु सरकार की सुप्रीम कोर्ट से अपील

Dec 2, 2025 - 16:28
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‘सीबीआई जांच का आदेश वापस लें, SIT जांच को मंजूरी दें’: तमिलनाडु सरकार की सुप्रीम कोर्ट से अपील

नई दिल्ली (आरएनआई) तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने विस्तृत हलफ़नामे में करूर भगदड़ मामले की सीबीआई जांच पर आपत्ति जताते हुए शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपने के अपने 13 अक्टूबर वाले आदेश को वापस ले और मद्रास हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) को जांच जारी रखने की अनुमति दे।

सरकार ने कहा कि स्थानीय पुलिस और SIT निष्पक्ष, वैज्ञानिक और व्यापक जांच करने में सक्षम हैं, और ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जो सीबीआई हस्तक्षेप को उचित ठहराती हो। उल्लेखनीय है कि करूर में अभिनेता-से-राजनीतिज्ञ बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्रि कझगम’ (TVK) की रैली में मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस हादसे के बाद TVK की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

तमिलनाडु सरकार ने अपने जवाब में करूर जिला प्रशासन और पुलिस पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों को ‘पूरी तरह निराधार’ बताया। सरकार ने कहा कि रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप की गई थी।

सरकार ने बताया कि कार्यक्रम में 606 पुलिसकर्मियों और होमगार्ड्स की तैनाती की गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों—आईजी (सेंट्रल जोन) और करूर के एसपी—ने पूरी योजना की निगरानी की। स्थल चयन, प्रवेश मार्ग, भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा इंतजाम और यातायात प्रबंधन सभी मानकों के अनुसार थे।

राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता जी.एस. मणि पर राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित याचिकाएं दायर करने का आरोप भी लगाया।

सीबीआई को जांच सौंपते समय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने करूर त्रासदी को “राष्ट्र की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला हादसा” बताया था और कहा था कि ऐसी गंभीर घटना में निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। इसी आधार पर अदालत ने जांच सीबीआई को सौंपी थी। साथ ही हाईकोर्ट द्वारा गठित SIT और एक-सदस्यीय जांच आयोग की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी और राज्य सरकार को सीबीआई के साथ पूर्ण सहयोग का निर्देश दिया था।

अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार की उस टिप्पणी की भी आलोचना की थी, जिसमें TVK पार्टी और उसके सदस्यों को पक्षकार बनाए बिना उनके खिलाफ अवलोकन दर्ज किए गए थे।

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