वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने खींचा रथ
वृंदावन। भगवान श्री जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा महोत्सव के उपलक्ष्य में गुरुवार, 16 जुलाई को वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की दिव्य एवं भव्य रथयात्रा का आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। संपूर्ण मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन, मृदंग एवं करताल की मधुर ध्वनि तथा "जय जगन्नाथ" के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा।
यह आयोजन विशेष रूप से संस्था में कार्यरत संतों, भक्तों एवं साधुओं के परिवारों के बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, वैदिक संस्कृति एवं आध्यात्मिक संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। बच्चों ने अत्यंत उत्साह एवं श्रद्धा के साथ रथयात्रा में सहभागिता कर भगवान की सेवा का दुर्लभ अवसर प्राप्त किया।
रथयात्रा से पूर्व भगवान श्री जगन्नाथ का विशेष श्रृंगार किया गया तथा विविध प्रकार के राजभोग अर्पित किए गए। संपूर्ण मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों एवं मनमोहक सजावट से अलंकृत किया गया। विशेष फूल बंगला सेवा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगल आरती के मध्य भगवान श्री जगन्नाथ अपने दिव्य रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए नृत्य करते रहे और भगवान के जयघोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक आनंद में सराबोर हो गया।
मंदिर के संतों ने अपने संदेश में कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा समस्त मानव समाज के लिए प्रेम, करुणा, समानता और ईश्वर की शरणागति का संदेश देती है। भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आकर यह प्रेरणा देते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के उनकी कृपा का अधिकारी है। ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में भक्ति, संस्कार एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
रथयात्रा के उपरांत भगवान की भव्य आरती संपन्न हुई तथा उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। पूरे आयोजन में भक्तों का उत्साह, अनुशासन एवं सेवा-भाव देखते ही बनता था। वृंदावन चंद्रोदय मंदिर द्वारा आयोजित इस भव्य रथयात्रा ने एक बार पुनः ब्रजभूमि के आध्यात्मिक वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
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