'बुलडोजर कार्रवाई पर पूर्ण रोक नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माणों पर स्पष्ट किया अपना रुख
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि नवंबर 2024 में दिया गया उसका फैसला अवैध निर्माणों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान नहीं करता। हालांकि, अदालत ने दोहराया कि किसी भी संपत्ति को ध्वस्त करने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस देना और जवाब के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना अनिवार्य है।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने नवंबर 2024 के फैसले के कथित उल्लंघन को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रत्येक प्रकरण के तथ्य अलग-अलग होते हैं, इसलिए इनकी सुनवाई संबंधित हाई कोर्ट द्वारा की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन अवमानना याचिकाओं से जुड़े रिकॉर्ड संबंधित हाई कोर्टों को भेजे जाएं, ताकि वे अपने अधिकार क्षेत्र में मामलों की सुनवाई कर उचित निर्णय ले सकें। अदालत ने कहा कि शीर्ष न्यायालय प्रत्येक मामले के तथ्यों की अलग-अलग जांच नहीं कर सकता।
गौरतलब है कि 13 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे। फैसले में कहा गया था कि किसी भी संपत्ति को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस देना होगा और उसे अपना पक्ष रखने के लिए कम से कम 15 दिनों का समय दिया जाएगा। साथ ही, ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को कानून के दायरे में और निर्धारित नियमों के अनुसार ही पूरा किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसका पूर्व फैसला अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के लिए नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए था कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए।
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