विस्फोट के बाद राख का विशाल गुबार भारत की ओर, प्रभावित हुई उड़ानें; DGCA ने जारी की एडवाइजरी

Nov 25, 2025 - 10:28
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विस्फोट के बाद राख का विशाल गुबार भारत की ओर, प्रभावित हुई उड़ानें; DGCA ने जारी की एडवाइजरी

नई दिल्ली (आरएनआई)। इथियोपिया के हैली गुबी ज्वालामुखी में 12,000 साल बाद हुए विस्फोट के बाद उठा राख का विशाल गुबार अब भारत के आसमान तक पहुंच गया है। रेड सी से होते हुए यह बादल दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर से गुजर रहा है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बड़ा असर पड़ा है। कई विमान रद्द होने पड़े, जबकि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस को प्रभावित क्षेत्रों से बचने और रूट बदलने की सलाह दी है।

घटना कैसे पहुंची भारत तक?
रविवार को हैली गुबी ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट हुआ। इससे उठी राख रेड सी, यमन, ओमान होते हुए अरब सागर पार कर उत्तर भारत की ओर बढ़ गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक राख का बादल बहुत ऊँचाई पर है, इसलिए जमीन पर वायु गुणवत्ता पर ज्यादा असर की आशंका कम है, लेकिन निगरानी बढ़ा दी गई है।

फ्लाइट्स पर बड़ा असर
राख का सबसे ज्यादा प्रभाव दिल्ली NCR और उत्तर भारत के उड़ानों पर दिख रहा है। कई एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द या मोड़े जाने का निर्णय लिया है।

एअर इंडिया ने कई उड़ानें रद्द कीं
सुरक्षा की दृष्टि से एयर इंडिया ने उन विमानों की जांच शुरू की है जो प्रभावित क्षेत्रों से उड़ान भर चुके हैं। कुछ रद्द उड़ानों की सूची इस प्रकार है:

तारीख    फ्लाइट नंबर    मार्ग
24 नवंबर    AI 106    न्यूआर्क – दिल्ली
24 नवंबर    AI 102    न्यूयॉर्क (JFK) – दिल्ली
24 नवंबर    AI 2204    दुबई – हैदराबाद
24 नवंबर    AI 2290    दोहा – मुंबई
24 नवंबर    AI 2212    दुबई – चेन्नई
24 नवंबर    AI 2250    दमाम – मुंबई
24 नवंबर    AI 2284    दोहा – दिल्ली
25 नवंबर    AI 2822    चेन्नई – मुंबई
25 नवंबर    AI 2466    हैदराबाद – दिल्ली
25 नवंबर    AI 2444/45    मुंबई – हैदराबाद – मुंबई
25 नवंबर    AI 2471/72    मुंबई – कोलकाता – मुंबई
अकासा एयर ने सभी विदेशी उड़ानें रोकीं

अकासा एयर ने जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी के लिए 24-25 नवंबर की सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दीं। यात्रियों को पूरा रिफंड या 7 दिनों में फ्री री-बुकिंग का विकल्प दिया गया है।

इंडिगो ने भी बदले रूट
इंडिगो ने भी कई फ्लाइट्स के रूट बदले। उदाहरण:
कन्नूर–अबू धाबी उड़ान 6E1433 को राख का गुबार पास आने पर अहमदाबाद की ओर मोड़ दिया गया।

क्यों होता है खतरा?
ज्वालामुखी की राख में सूक्ष्म कण होते हैं जो–
विमान इंजन को नुकसान पहुँचा सकते हैं
विंडस्क्रीन और सेंसर को प्रभावित करते हैं
दृश्यता घटाते हैं
इसलिए ऐसी परिस्थितियों में उड़ानें जोखिमपूर्ण मानी जाती हैं।

DGCA की कड़ी एडवाइजरी
DGCA ने एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को ये निर्देश दिए:
राख वाले आसमानी मार्गों से उड़ान न भरें
उड़ान मार्ग और ईंधन योजना में बदलाव करें
इंजन में समस्या, केबिन में धुआं या गंध जैसी घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट करें
एयरपोर्ट रनवे, टैक्सीवे और एप्रन पर राख की जांच की जाए
मौसम विभाग और सैटेलाइट डेटा से नियमित अपडेट लेते रहें

फिलहाल स्थिति
ऊँचाई पर राख होने से जमीन पर प्रदूषण का खतरा फिलहाल कम
अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवाओं में अस्थायी बाधा
निगरानी और राहत प्रबंधन जारी

ज्वालामुखी विस्फोट का इतनी दूर हवा और उड़ानों पर असर यह बताता है कि प्राकृतिक घटनाएं वैश्विक आधुनिक व्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकती हैं।

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