रेलवे मुख्यालय के आदेश की खुलेआम अवहेलना, भोपाल मंडल पर गंभीर आरोप, वर्षों से यात्रियों से एक्सप्रेस किराया वसूली, जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा पर भी सवाल
जबलपुर / गुना / अशोकनगर (आरएनआई) पश्चिम मध्य रेलवे की मेमू गाड़ी संख्या 11603/11604 (बीना–कोटा / कोटा–बीना) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। मामला केवल किराये का नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन की मनमानी, मुख्यालय के आदेशों की अवहेलना और आम यात्रियों के आर्थिक शोषण से जुड़ा हुआ है।
रेल मुख्यालय, पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर द्वारा 28 मार्च 2022 को जारी पत्र क्रमांक WCR/JBP/T-547/Conversion of Mail/Express में यह स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिन मेमू गाड़ियों के नंबर 0 या 1 से शुरू होते हैं, उनमें एक्सप्रेस किराया लिया जाएगा।
गाड़ी संख्या 11603/11604 इसी श्रेणी में आती है और यह भोपाल एवं कोटा—दोनों मंडलों से होकर गुजरती है।
लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।
❗ एक ही गाड़ी, दो मंडल – दो अलग कानून
गुना से कोटा तक (कोटा मंडल) → साधारण यात्री किराया
मावन से बीना तक (भोपाल मंडल) → एक्सप्रेस किराया
यानी, एक ही ट्रेन, एक ही दिन, एक ही यात्री से दो अलग-अलग किराये!
यह न केवल रेलवे नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों के साथ सीधा अन्याय और धोखा है।
? श्रद्धेय सांसद के क्षेत्र में भी नहीं सुनवाई?
मामला और भी संवेदनशील इसलिए हो जाता है क्योंकि गुना–अशोकनगर क्षेत्र देश के श्रद्धेय सांसद महाराज साहब का संसदीय क्षेत्र है। आरोप है कि इसी क्षेत्र के आम नागरिकों और उनके परिवारजनों से भोपाल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी पिछले कई महीनों से इस मेमू गाड़ी में एक्सप्रेस किराया वसूल रहे हैं, जबकि कोटा मंडल में वही गाड़ी साधारण किराये पर चल रही है।
इस दोहरी व्यवस्था से—
यात्रियों में आक्रोश और भ्रम फैल रहा है
मंडलों के बीच अविश्वास पैदा हो रहा है
और यह संदेश जा रहा है कि भोपाल मंडल के अधिकारी न तो मुख्यालय के आदेश मानते हैं, न ही जनप्रतिनिधियों की परवाह करते हैं
❓ सवाल जो रेलवे को जवाब देने होंगे
जब मुख्यालय का आदेश पूरे जोन पर लागू है, तो कोटा मंडल उसे क्यों नहीं मान रहा?
यदि कोटा मंडल सही है, तो भोपाल मंडल किस अधिकार से एक्सप्रेस किराया वसूल रहा है?
वर्षों से वसूले गए अतिरिक्त किराये की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या आम यात्री नियमों की कीमत चुका रहा है?
?️ यात्री सेवा संगठन का कड़ा रुख
यात्री सेवा संगठन, मध्य प्रदेश के प्रतिनिधि एवं XZRUCC सदस्य सुनील आचार्य ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई, और यात्रियों से वसूले गए अवैध एक्सप्रेस किराये की वापसी की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि रेलवे प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला रेलवे बोर्ड, जनप्रतिनिधियों और न्यायिक मंचों तक ले जाया जाएगा।
? सवाल सिर्फ किराये का नहीं, भरोसे का है
यह प्रकरण केवल कुछ रुपये के किराये का नहीं है, बल्कि रेलवे की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा है।
यदि एक ही ट्रेन में मंडल बदलते ही कानून बदल जाए, तो आम यात्री किस पर भरोसा करे?
अब निगाहें रेल महाप्रबंधक, पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर पर टिकी हैं—
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या यह पीड़ा यूँ ही पटरियों पर दौड़ती रहेगी?
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