राज्यसभा में आंगनवाड़ी रसोई का आधुनिकीकरण, भोजपुरी एकेडमी की मांग; वायु प्रदूषण पर भी गंभीर चिंता
नई दिल्ली (आरएनआई) राज्यसभा में मंगलवार को शून्यकाल के दौरान सांसदों ने आंगनवाड़ी रसोई के आधुनिकीकरण से लेकर भोजपुरी साहित्य अकादमी की स्थापना और बढ़ते वायु प्रदूषण संकट तक कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।
भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने आंगनवाड़ी पोषण रसोई को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रम बनाने की मांग की। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि आंगनवाड़ियों में स्टील के बर्तन, स्वच्छ भंडारण स्थान, साफ-सुथरा काउंटर, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी नेटवर्क भारत की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण उपलब्धियों में से एक है, जिसे आज की जरूरतों के अनुरूप अपग्रेड करना आवश्यक है। सांसद ने बाजरे आधारित पोषण मेन्यू को बढ़ावा देने, भोजन आपूर्ति में स्वयं सहायता समूहों (SHG) को जोड़ने और आंगनवाड़ियों की डिजिटल मॉनिटरिंग एवं ग्रोथ ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने की भी वकालत की।
भोजपुरी साहित्य एकेडमी की मांग
सांसद कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और देवरिया जिलों में केंद्रीय भोजपुरी साहित्य अकादमी की स्थापना की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इस अकादमी से सीमांचल, मिथिला और नेपाल तक के साहित्यकारों और कलाकारों को एक साझा मंच मिलेगा तथा भोजपुरी भाषा को संरक्षण देने में मदद मिलेगी।
उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश में भोजपुरी अकादमी चल रही हैं, जबकि उत्तर प्रदेश—जिसे भोजपुरी का गढ़ कहा जाता है—में अब तक ऐसी कोई अकादमी नहीं है।
वायु प्रदूषण को बताया पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी
वाईएसआरसीपी सांसद अयोध्या रामी रेड्डी अल्ला ने वायु प्रदूषण को देश के लिए “सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति” करार दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर सात में से एक व्यक्ति को प्रदूषण के कारण समय से पहले मौत का खतरा है। पिछले वर्ष 17,000 से अधिक मौतें सीधे तौर पर खराब वायु गुणवत्ता से जुड़ी थीं, और राजधानी का AQI अक्सर ‘गंभीर’ श्रेणी में बना रहा।
रेड्डी ने विशाखापत्तनम की स्थिति पर भी चिंता जताई, जहां 7 वर्षों में PM10 स्तर में 32.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत आंध्र प्रदेश को मिले 129.4 करोड़ रुपये में से सिर्फ 39.64 करोड़ रुपये ही खर्च हुए, जिससे मॉनिटरिंग, विभागीय तालमेल और स्थानीय प्रशासन में गंभीर कमजोरियां उजागर होती हैं।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण के चलते भारत को हर साल अपनी GDP का 3% से अधिक नुकसान उठाना पड़ता है और समस्या से निपटने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।
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