ममता बनर्जी का PM मोदी पर हमला: “बंकिम चंद्र को 'दा' कहना असम्मान — तुरंत मांगे माफी”

Dec 9, 2025 - 16:46
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ममता बनर्जी का PM मोदी पर हमला: “बंकिम चंद्र को 'दा' कहना असम्मान — तुरंत मांगे माफी”

नई दिल्ली (आरएनआई) पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग करते हुए उन पर बंगाल के सांस्कृतिक गौरव का अपमान करने का आरोप लगाया। बनर्जी का कहना है कि लोकसभा में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई बहस के दौरान पीएम ने उसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहकर संबोधित किया, जो असम्मानजनक है।

कूचबिहार में एक जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा कि बंकिम चंद्र राष्ट्र के महान साहित्यकार और बंगाल पुनर्जागरण की पहचान हैं, और प्रधानमंत्री ने उनके प्रति ‘न्यूनतम सम्मान’ भी नहीं दिखाया। उन्होंने कहा, “देश को आज़ादी मिलने के समय आपका जन्म भी नहीं हुआ था और आप बंगाल की अस्मिता पर टिप्पणी कर रहे हैं। इसके लिए आपको राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।”

ममता बनर्जी ने इस दौरान केंद्र सरकार पर बंगाल के अधिकारों में कटौती का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य की योजनाएँ बिना केंद्र की मदद के ही चलाई जा रही हैं। केंद्र द्वारा तिमाही लेबर बजट पर जवाब मांगने के नोटिस को उन्होंने “निरर्थक” बताया और कहा कि “हम बंगाल की जनता के भरोसे हैं, केंद्र के निर्देशों पर नहीं।”

विवाद की शुरुआत तब हुई जब टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने लोकसभा में ‘दा’ के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री से ‘बंकिम बाबू’ कहने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने उनकी भावना स्वीकार करते हुए तुरंत शब्द सुधार लिया और हल्के अंदाज़ में पूछा कि क्या वह अब रॉय को ‘दादा’ कह सकते हैं।

इसी मुद्दे पर टीएमसी ने भाजपा पर बंगाल की संस्कृति और पहचान पर प्रहार करने का आरोप भी लगाया। ममता ने दावा किया कि यदि भाजपा राज्य में सत्ता में आती है, तो वह बंगाल की भाषा, विरासत और इतिहास को क्षति पहुँचाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होते ही चुनाव घोषित कर दिए जाएंगे, ताकि कानूनी चुनौती की गुंजाइश न बचे।

इधर, संसद में भी टीएमसी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने सेंट्रल हॉल में मौन प्रदर्शन किया और रवींद्रनाथ टैगोर तथा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की तस्वीरें हाथ में थामे बैठे रहे। राज्यसभा में पार्टी की उपनेता सागरिका घोष ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बंगाल की गौरवशाली साहित्यिक विरासत को गलत तरीके से पेश किया और महान विभूतियों के नाम तक का सम्मान नहीं किया।

बंगाल की राजनीति में यह विवाद एक नया तीखा मोड़ लेकर आया है, जो आने वाले चुनावी दौर में और भी गहराने की संभावना है।

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