मथुरा मंडी में करोड़ों का कारोबार: किसानों की मेहनत को मिले सही दाम, संगठन निभाएं सकारात्मक भूमिका
मथुरा/हापुड़ (आरएनआई) मथुरा की मुख्य अनाज मंडी रोज़ाना करोड़ों रुपए के व्यापार का केंद्र बनी हुई है, जहां दूर-दराज के किसान अपनी उपज लेकर आते हैं। अकेले मथुरा में ही रोज़ 2 करोड़ रुपए प्रतिदिन की फसल पहुंच रही है, जिसमें हर दिन लगभग 50 हज़ार क्विंटल धान और अन्य फसलें शामिल हैं। यह विशाल व्यापार न सिर्फ किसानों की आय का जरिया है, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
बाज़ार की चुनौतियां और अवसर
हालांकि, इतनी बड़ी व्यापारिक गतिविधि के बावजूद किसानों के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। अखबार के अनुसार, धान की कीमतें सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बिक रही हैं, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, कुछ व्यापारी गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
लेकिन, इन चुनौतियों को सुधार के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
संगठनों के लिए पहल का समय
कृषक संगठन और मंडी समितियों को अब चुप्पी तोड़कर सकारात्मक भूमिका निभाने की ज़रूरत है। यह समय किसानों के हितों की रक्षा के लिए संगठित प्रयास करने का है। यदि सभी संगठन एक साथ मिलकर काम करें, तो:
सरकारी नियमों का पालन: यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले।
पारदर्शिता: मंडी के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाई जा सकती है, जिससे बिचौलियों की मनमानी कम हो।
जागरूकता: किसानों को उनकी उपज की सही कीमत और बेचने के सर्वोत्तम तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सकता है।
आगे का रास्ता: एक समृद्ध मंडी
सरकारी अधिकारियों, व्यापारियों, और किसान संगठनों को मिलकर एक ऐसा पारदर्शी और सशक्त तंत्र बनाना होगा, जिससे करोड़ों का यह कारोबार केवल कुछ लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर एक किसान के लिए समृद्धि का द्वार खोले। मथुरा की मंडी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के निर्यात की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें संगठित प्रयास से साकार किया जा सकता है।
यह मंडी क्षेत्र के विकास का एक शक्तिशाली इंजन बन सकती है—बस ज़रूरत है एक सकारात्मक बदलाव की।
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