'बाढ़ मानव जनित नहीं, वैज्ञानिक आधार पर छोड़ा गया पानी' — केंद्र ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज किया
केंद्र सरकार ने ममता बनर्जी के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि दामोदर घाटी निगम ने वैज्ञानिक तरीके से पानी छोड़ा था और सभी पक्षों के साथ समन्वय किया गया था। जलाशयों में भारी मात्रा में पानी भरने के बावजूद जलाशय विनियमन समिति ने बाढ़ का खतरा कम करने के लिए पानी की निकासी को नियंत्रित रखा। ममता बनर्जी ने इसे बाढ़ प्रबंधन की विफलता और केंद्र की ओर से जानबूझकर की गई साजिश बताया था।
नई दिल्ली (आरएनआई) केंद्र सरकार ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस आरोप को सिरे से खारिज किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि राज्य में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की ओर से जानबूझकर बाढ़ लाई गई है। जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि मैथन और पंचेत जलाशयों से पानी पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से छोड़ा गया और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय किया गया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि डीवीसी बंगाल विरोधी है और राज्य में मानव जनित आपदा के लिए जिम्मेदार है। इसके जवाब में मंत्री पाटिल ने कहा, पानी छोड़ने का फैसला दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (डीवीआरआरसी) लेती है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग करता है और इसमें डीवीसी, पश्चिम बंगाल और झारखंड के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
पाटिल ने बताया कि मई से जुलाई 2025 के बीच दामोदर जलग्रहण (बेसिन) क्षेत्र में 815 मिलीमीटर बारिश हुई, जो बीते वर्षों की तुलना में काफी अधिक थी। इसके कारण जून-जुलाई 2025 में जलाशयों में पानी की आमद 2024 की तुलना में 16 गुना और 2023 की तुलना में 43 गुना अधिक रही। उन्होंने कहा कि इतनी भारी मात्रा में पानी आने के बावजूद डीवीआरआरसी ने पानी की निकासी को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित किया गया और निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा कम करने के लिए अधिकतम 70,000 क्यूसेक तक सीमित रखा गया।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने आरोप लगाया था कि यह बाढ़ प्रबंधन में विफलता है और जानबूझकर बार-बार बाढ़ जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से संचालित यह एजेंसी इतिहास में पहली बार बंगाल को इस स्तर पर विफल कर रही है और यह संकट केंद्र की ओर जानबूझकर पैदा किया गया है।
बनर्जी ने दावा किया कि जून-जुलाई 2024 में जहां 4,535 लाख घन मीटर पानी छोड़ा गया था, वहीं 2025 में इसी अवधि में यह आंकड़ा 50,287 लाख घन मीटर तक पहुंच गया। उनका कहना है कि अचानक छोड़े गए पानी से कई जिले तबाह हो गए, सड़कों को नुकसान पहुंचा, तटबंध टूटे और बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
उन्होंने इस स्थिति को गंभीर और विचलित करने वाला बताया और कहा कि 2023 की तुलना में 30 गुना ज्यादा पानी की निकासी यह दर्शाता है कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि साजिश है। ममता ने मांग की है कि ऐसे पानी छोड़ने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।
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