पूर्व IAS प्रशिक्षु की मां पर आरोप: पुलिस को डराने छोड़े कुत्ते, अपराधियों की फरारी में मदद
नवी मुंबई के एक पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर मनोरमा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुणे पुलिस और नवी मुंबई पुलिस की एक संयुक्त टीम सोमवार दोपहर मनोरमा खेडकर के बंगले पर फिर से पहुंची, लेकिन वह गायब मिलीं।
मुंबई (आरएनआई) पूर्व आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर ने कथित तौर पर एक ट्रक चालक के अपहरण के दो आरोपियों को पुणे स्थित उनके घर से भागने में मदद की। उन्होंने नवी मुंबई पुलिस टीम को डराने के लिए खूंखार कुत्ते छोड़ दिए। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि नवी मुंबई पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर और उनके अंगरक्षक प्रफुल सालुंखे के रूप में की है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे पहले शनिवार शाम को हुए अपहरण के कुछ ही घंटों के भीतर रविवार को चालक को पूजा खेडकर के पुणे स्थित घर से छुड़ा लिया गया।
नवी मुंबई के रबाले पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना नवी मुंबई के मुलुंड-ऐरोली रोड पर उस समय हुई, जब प्रह्लाद कुमार (22) की ओर से चलाया जा रहा कंक्रीट मिक्सर ट्रक एक लैंड क्रूजर कार से टकरा गया, जिसके बाद उसके और एसयूवी में सवार दो लोगों के बीच बहस हो गई। उन्होंने बताया कि दिलीप खेडकर और सालुंखे ने प्रह्लाद को एसयूवी में बिठाया और उन्हें पुणे के बानेर इलाके में पूजा खेडकर के बंगले पर ले गए।
इस बीच एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नवी मुंबई पुलिस ने प्रह्लाद कुमार का लोकेशन खेडकर के बंगले पर ट्रेस किया। चतुश्रृंगी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया, 'पुणे के चतुश्रृंगी पुलिस थाने के कर्मियों के साथ नवी मुंबई पुलिस की एक टीम रविवार को खेडकर के बंगले पर गई। यह जानते हुए कि पुलिस बाहर है, प्रह्लाद कुमार को छोड़ दिया गया और बंगले का गेट बंद कर दिया गया।'
प्रह्लाद कुमार ने पुलिस को बताया कि उसका अपहरण करने वाले दो लोग बंगले के अंदर थे। अधिकारी ने बताया, 'रबाले के एक पुलिस अधिकारी ने घंटी बजाई और चौकीदार से घर से किसी को बुलाने को कहा। मनोरमा खेडकर बाहर आईं, लेकिन उन्होंने गेट नहीं खोला। पुलिस ने उन्हें अपने आने का कारण बताया और अपहरण मामले में शामिल दो व्यक्तियों और कार का पता लगाने में उनका सहयोग मांगा। हालांकि, उन्होंने गेट खोलने से इनकार कर दिया। इसके बजाय मनोरमा ने कथित तौर पर एफआईआर की तस्वीर खींची और पुलिसकर्मियों को आश्वासन दिया कि वह दोनों आरोपियों को रविवार दोपहर 3 बजे तक चतुश्रृंगी पुलिस स्टेशन ले आएगी।'
अधिकारी ने आगे कहा, 'उसकी बात मानकर पुलिस टीम वहां से चली गई। हालांकि, जब उन्होंने उसे दोपहर 3 बजे के आसपास बुलाया, तो उसने आने से इनकार कर दिया और कहा कि वे जो चाहें करें।' उन्होंने बताया कि जब पुलिसकर्मी बंगले पर लौटे, तो उन्होंने पाया कि अपराध में शामिल कार गायब थी। मनोरमा ने कथित तौर पर कार को हटाना सुनिश्चित किया, दोनों आरोपियों को भागने में मदद की और पुलिस टीम को डराने के लिए गेट के अंदर दो खूंखार कुत्ते छोड़ दिए।
नवी मुंबई के एक पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर मनोरमा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं, जिनमें धारा 221 (किसी सरकारी कर्मचारी के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालना) शामिल है, के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुणे पुलिस और नवी मुंबई पुलिस की एक संयुक्त टीम सोमवार दोपहर मनोरमा खेडकर के बंगले पर फिर से पहुंची, लेकिन वह गायब मिलीं। चतुश्रृंगी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उत्तम भजनवाले ने बताया, 'चूंकि मुख्य द्वार खोलने के लिए कोई मौजूद नहीं था, इसलिए पुलिसकर्मी लोहे का गेट फांदकर परिसर में घुस गए। हालांकि, मनोरमा खेडकर अंदर नहीं मिलीं।'
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