पीएम मोदी के बयान पर स्टालिन का तीखा प्रहार
केंद्र से किए तीन सवाल, भाजपा पर लगाए ये आरोप
चेन्नई (आरएनआई) कच्चातिवु द्वीप मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान और केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की प्रेस कॉन्फेरेंस के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पलटवार किया है। उन्होंने मछुआरों के प्रति अचानक भाजपा का प्यार जागने पर सवाल उठाया है। पीएम मोदी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को लेकर आलोचना करने के बाद सीएम स्टालिन ने इसे ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया है।
मीडिया से बात करते हुए स्टालिन ने कहा, "10 वर्षों से कुंभकर्ण की नींद से उठने के बाद जो मछुआरों के प्रति अपना प्यार दिखा रहे हैं, तमिलनाडु की जनता उनसे तीन सवाल पूछना चाहती हैं। केंद्र सरकार तमिलनाडु द्वारा कर के रूप में दिए गए एक रुपये में से 29 पैसे क्यों लौटाती है? राज्य को दो प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा, इस दौरान केंद्र ने बाढ़ राहत के तौर पर तमिलनाडु को एक भी पैसा क्यों नहीं दिया? वह एक ऐसी परियोजना के बारे में बता दें जिसे पिछले दस वर्षों में उनके द्वारा राज्य में लागू किया गया है?"
उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "ध्यान भटकाने की रणनीति न करके वह (पीएम मोदी) पहले इन तीन सवालों का जवाब दें। इसी के साथ स्टालिन ने हैशटैग के साथ कहा 'बथिल सोलुंगा मोदी', जिसका मतलब है पीएम मोदी से जवाब मांग रहे हैं।"
कच्चातिवु द्वीप मामले को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने आज एक प्रेस कॉन्फेरेंस की थी। उन्होंने डीएमके पर इस मामले को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाने का आरोप लगाया है। जयशंकर के इस आरोप पर डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने पलटवार किया है। उन्होंने मीडिया से कहा, आप (भाजपा) यहां पिछले 10 वर्षों से सत्ता में है। इस दौरान भाजपा सरकार ने कच्चातिवु द्वीप को वापस पाने की कोशिश तक नहीं की। भाजपा अब ऐसा क्यों कर रही है? उन्हें मालूम है कि देशभर में वे 150 सीट भी नहीं जीत पाएंगे। वह इस मुद्दे को इसलिए उठाना चाहते हैं, ताकि चुनावी बॉन्ड से सबका ध्यान भटक जाए।
कच्चातिवु द्वीप को लेकर पीएम मोदी के पोस्ट और विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फेरेंस पर कांग्रेस नेता मनिकम टैगोर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के लोग भाजपा को खारिज कर रहे हैं और पार्टी ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
मीडिया से बात करते हुए अन्नादुरई ने कहा, "भाजपा, आरएसएस और पीएम मोदी के साथ एक ही परेशानी है। तमिलनाडु के लोग उन्हें खारिज कर रहे हैं और वह ध्यान भटकाने की रणनीति चाहते हैं। इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर किया था, जिसे इंदिरा गांधी-सिरीमावो भंडारनायके समझौता के नाम से जाना जाता है। छह लाख तमिलों को बचाने के लिए यह द्वीप श्रीलंका को दे दी गई थी। हम स्पष्ट थे कि अगर हमारे मछुआरों पर हमला किया गया तो हम इस द्वीप को वापस पाने के लिए आवाज उठाएंगे। लेकिन इन 10 वर्षों में पीएम मोदी ऐसा करने में नाकाम रहें।" उन्होंने दावा किया कि इस गिरी हुई रणनीति के साथ भाजपा तमिलनाडु में एक भी सीट नहीं जीत पाएगी।
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