पठकाना रामलीला मंच पर मार्मिक दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें हुईं नम
राम वनवास, केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत चित्रकूट गमन का सफल मंचन
हरदोई (आरएनआई) मोहल्ला पठकाना स्थित श्रीरामलीला मेला मंच पर रविवार की रात प्रस्तुत हुए राम वनवास, राम-केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत चित्रकूट गमन जैसे हृदयस्पर्शी प्रसंगों ने पूरे वातावरण को करुणा और व्यथा से भर दिया। मंचन इतना प्रभावी और यथार्थपूर्ण रहा कि दर्शकों की आंखें अश्रुपूरित हो गईं और पूरा मेला मैदान भावविह्वल दिखाई दिया।
मंच पर जैसे ही कैकेयी ने राजा दशरथ से राम के लिए वनवास का वरदान माँगा और राम, सीता तथा लक्ष्मण ने वनगमन का निश्चय किया, राजमहल से लेकर पूरी अयोध्या के व्याकुल होने का दृश्य मंचित हुआ। इस क्षण दर्शकों की आंखों से भी आँसू बहने लगे। माताएं, बहनें और वृद्धजन अपने जीवन के विछोह की यादों से जुड़कर गहराई तक द्रवित हो उठे।
वनगमन के मार्ग में जब प्रभु श्रीराम का केवट से साक्षात्कार हुआ तो पूरा वातावरण भक्तिभाव से भर गया। केवट का प्रभु चरण धोने का आग्रह और उनकी विनम्रता ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंचन देख रहे बच्चे भी इस दृश्य में मंत्रमुग्ध हो उठे।
उधर अयोध्या में जब मंत्री सुमंत भारी मन से राम के वन जाने का समाचार लेकर लौटे और मरणासन्न दशरथ को यह दुखद समाचार सुनाया, तो दशरथ की पीड़ा देखकर मंच पर ही नहीं, दर्शकदीर्घा में बैठे लोग भी स्तब्ध रह गए।
पुत्र-वियोग में तड़पते दशरथ का प्राण त्यागना इतना मार्मिक दृश्य बना कि कई वृद्ध पिता स्वयं भी आंसू पोंछते दिखे। मानो उन्हें अपने पुत्रों के विछोह और समय के बदलते व्यवहार की स्मृतियाँ छू रही हों।
इसके बाद जब भरत ने राम को अयोध्या लौटाने के संकल्प के साथ चित्रकूट की ओर गमन किया, तो दर्शकों के मन में भक्ति, करुणा और परिवार के प्रति असीम प्रेम की भावना जाग उठी।
अंततः परदा गिरते ही पूरा मेला मैदान एक गहन मौन में डूबा रहा। दर्शक अपने-अपने जीवन की परिस्थितियों और संबंधों पर चिंतन करते हुए धीरे-धीरे मैदान से लौटे। आरती संपन्न होने के बाद शेष श्रद्धालु भी भावविह्वल मन से घरों की ओर प्रस्थान कर गए।
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