पं. छन्नूलाल मिश्र की तेरहवीं पर परिवार में विवाद: बेटे पर संपत्ति बेचने और नकली रिश्तेदार मिलवाने के आरोप, बेटा बोला—परंपरा का निर्वहन नहीं हुआ
वाराणसी (आरएनआई)। सुर सम्राट पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र की तेरहवीं के अवसर पर परिवार के अंदर तीखा विवाद उभरा है। दिवंगत के बड़े पुत्र पं. रामकुमार मिश्र और पुत्री डॉ. नम्रता मिश्रा एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं—नम्रता ने बड़े भाई पर परंपराओं का पालन न करने और पिता की संपत्ति बेचने का आरोप लगाया है, जबकि रामकुमार ने बेटी पर संपत्ति पर ग़ैरकानूनी कार्रवाई और मुख्यमंत्री से मिलने के समय नकली रिश्तेदार पेश करने का आरोप लगाया है।
पारिवारिक घाव तब खुलकर सामने आया जब 2 अक्तूबर को देर से छन्नूलाल मिश्र का निधन हुआ। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया था। अंतिम संस्कार व तेरहवीं को लेकर पैदा हुए वैचारिक और वित्तीय मतभेद अब सार्वजनिक हो गए हैं।
डॉ. नम्रता का कहना है कि पिता का अंतिम संस्कार और तेरहवीं “विधि-विधान” के अनुसार नहीं हुई। उनके आरोपों के आधार पर, रामकुमार ने पिता की पुरानी निवासी संपत्ति (प्रसिद्दि में ‘छोटी गैबी’) बिना सूचना के बेच दी। नम्रता ने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार के बाद उनसे रात में 2 बजे 25,090 रुपये का भुगतान करने को कहा गया, जबकि उन्होंने कहा कि वे भुगतान करने में असमर्थ नहीं थीं और पारिवारिक परंपरा के अनुसार वे ब्राह्मणभोज कराएंगी। नम्रता ने बताया कि उन्होंने गरुणपुराण का पाठ शुरू कर दिया है और आगे दसवाँ—ग्यारस—त्रयोदशी आदि परंपरागत अनुष्ठान कराए जाएंगे।
दूसरी ओर पं. रामकुमार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि नम्रता ने बिना बताए पिता की संपत्ति बेच दी और मुख्यमंत्री के समक्ष नकली रिश्तेदारों को प्रस्तुत किया गया। रामकुमार का कहना है कि उन्होंने कर्मकांड निष्ठा के साथ निभाया और मुखाग्नि उनका पुत्र राहुल दे चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि झगड़ा जारी रहा तो वे मानहानि का मुकदमा भी कर सकते हैं। रामकुमार ने अपनी ओर से मंचन और शोक सभाओं का भी जिक्र किया और परिवार के कुछ सदस्यों पर आरोप-प्रत्यारोप किए।
परिवारिक झगड़ों में आर्थिक रंजिश, रस्मों के निर्वाह को लेकर मतभेद और सार्वजनिक मंचों पर विरोधाभासी बयानों ने विवाद को तेज कर दिया है। नम्रता ने यह भी कहा कि पिता के पिछले वर्षों में हुई मृत्यु पर परिवार ने पिछले सदस्यों (माताजी व बहन) के तेरह-दिन के अनुष्ठान संभव न होने के कारण विशेष अनुष्ठान करवाए थे, और पिताजी के निर्देशानुसार पिशाचमोचन व अन्य कर्म भी किए जा रहे हैं।
हालांकि किसी भी पक्ष ने अदालत में शिकायत दर्ज कराने की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की है—रामकुमार ने संकेत दिया है कि वे कानूनी विकल्प विचार कर सकते हैं। फिलहाल परिवार के भीतर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप और भावनात्मक तनाव से पारिवारिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
पृष्ठभूमि: पं. छन्नूलाल मिश्र को पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था; वे शास्त्रीय संगीत के जाने-माने गुरु व कलाकार माने जाते थे। उनके निधन के बाद मिलने वाले शोक संदेशों और प्रशंसाओं के बीच यह पारिवारिक विवाद सामाजिक ध्यान का विषय बन गया है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0



