धरनावदा हादसा: पीडि़त परिवारों से मिले प्रभारी मंत्री, ग्रामीणों में अब भी गुस्सा, जांच समिति गठित, सात दिन में सौंपेगी रिपोर्ट
गुना (आरएनआई) जिले के धरनावदा गांव में कुएं में उतरे पांच ग्रामीणों की दर्दनाक मौत के बाद अब सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए 9 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी है। यह समिति आगामी 7 दिनों में हादसे के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी। बुधवार को राज्य सरकार के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गांव पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी कोई भी हो, जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना मंगलवार सुबह करीब 10 बजे उस समय घटी, जब गांव के पास आम के बाग में बने एक पुराने कुएं में एक गाय गिर गई थी। गाय को बाहर निकालने के प्रयास में छह लोग कुएं में उतर गए। लेकिन कुएं में मौजूद जहरीली गैस के कारण पांच लोग भीतर ही बेहोश होकर गिर पड़े और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। एक युवक किसी तरह बाहर निकल पाया। घटना के बाद प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद पांचों के शव कुएं से निकाले गए। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार देर रात सभी मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतकों की पहचान सिद्धार्थ सहरिया, मन्नू कुशवाह, गुरुदयाल ओझा, शिवचरण साहू और सोनू कुशवाह के रूप में हुई है।
घटना के बाद प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत बुधवार सुबह धरनावदा पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले हादसे के कुएं का निरीक्षण किया और फिर पीडि़त परिवारों से मिले। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से संवेदना प्रकट करते हुए बताया कि प्रत्येक मृतक परिवार को 4 लाख की आर्थिक सहायता तुरंत स्वीकृत कर दी गई है और यह राशि उनके खातों में स्थानांतरित हो चुकी है। घटनास्थल का मुआयना करते हुए मंत्री राजपूत ने कहा कि अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। कोई इसे करंट का मामला बता रहा है, कोई पानी में जहर या कुएं में गैस की बात कर रहा है। ऐसे में सच जानने के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति गठित की गई है जो दुर्घटना के कारणों, राहत कार्य की तत्परता, जिम्मेदार विभागों की भूमिका और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी।
इस मौके पर उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बरसात के मौसम को देखते हुए जिले के सभी कुओं और बावडिय़ों की सुरक्षा का विशेष निरीक्षण कराया जाए। मंत्री के साथ जिला कलेक्टर, एसपी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। वहीं, घटना के बाद कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे सरकारी हत्या बताते हुए कहा कि जब तक सुरक्षा उपायों की अनदेखी बंद नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। धरनावदा की यह त्रासदी केवल पांच लोगों की जान जाने का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, गांवों की सुरक्षा तैयारियों और जनसंवेदना की एक बड़ी परीक्षा बन गई है। अब सबकी नजरें जांच समिति की रिपोर्ट और सरकार की भविष्य की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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