दो दिवसीय मेले में दंगल व सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन
कछौना, हरदोई( आरएनआई )विकास खण्ड कछौना की ग्राम सभा बालामऊ में दो दिवसीय जल विहार मेले का आयोजन किया गया। यह मेला अश्वनी मास के दूसरे पखवाड़े में नवरात्रि के दौरान 50 वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। जल विहार मेले का आयोजन हरदोई से उन्नाव तक कई गांव में किया जाता है। इसका उद्देश्य सामाजिक एकत्रीकरण हैं। आज से 50 वर्ष पूर्व वर्ष 1975 में ग्राम प्रधान रोहन लाल की अध्यक्षता में इस मेले का प्रथम वार वैभवपूर्ण प्रदर्शन भगवान कृष्ण की नाच नचैया लीला से प्रारंभ हुआ था, क्वार मास की शुक्ल पक्ष की द्विज व तीज को विशाल मेला व दंगल के साथ नौटंकी का दो दिन के लिए आयोजन किया जाता था। तत्कालीन ग्राम प्रधान ने सराहनीय कदम उठाते हुए मेला की मंजूरी इस शर्त पर दी थी कि मेला के दूसरे दिन दोपहर 12:00 से 4:00 तक सभी पुरुष वर्ग दंगल देखेंगे और बाद में गांव की महिला स्वतंत्र रूप से मेला देखेगी, एक भी पुरुष मेले में न रहे, जिसका पालन कमेटी के युवक करते हैं। इसी के चलते आज तक कोई छेड़छाड़ इस मेले में नहीं हुई है। परंतु 50 वर्ष पहले वाला मेला अब नहीं है। पहले वर्ष एक नौटंकी होती थी, अब 14 से भी ज्यादा नौटंकी हो जाती हैं। पहले संस्कृतिक व धार्मिक अवसरों पर दूर-दराज के रिश्तेदार इकट्ठा होते हैं। क्योंकि नवरात्रि के दिन होने के कारण शादी विवाह की बात चलाने और विवाह को दिखाई व वरीक्षा आदि के लिए अनुकूल होते हैं। इसी को ध्यान मे रखकर इस सांस्कृतिक द्विदिवसीय मेले का आयोजन होता रहा है। अब समय बदल रहा है और लोग एक फोन कॉल की दूरी पर हैं, तो मेला मात्र शोहदों का जमावड़ा बन गया है। बालामऊ गाँव में मेले के साथ होने वाला दंगल अपनी अलग पहचान रखता है। यहाँ क्षेत्र के स्तरीय पहलवान इकट्ठा होते थे और अपने दांव-पेंच आजमाते थे। इसका स्वरूप थोड़ा अवश्य बदला है। यह अब खेल न होकर मात्र मनोरंजन का मंच बन गया है। फिर भी कहीं न कहीं यह कुश्ती जैसी विधा को क्षेत्र मे जीवित किये हुए है। इसी क्रम में दंगल का आयोजन ग्राम प्रधान आलोक कुमार उर्फ विपिन ने पहलवानों का हाथ मिलाकर शुभारंभ किया। ग्राम प्रधान ने कहा इस तरह के आयोजन से ग्रामीण क्षेत्र में अपने अंदर छिपी प्रतिभाओं को निखारने का मौका मिलता है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इस दंगल आयोजन में दूर-दराज से पुरुष महिलाओं ने भी करतब दिखाए। क्षेत्रीय पहलवानों के साथ दूसरे राज्य के पहलवानों ने दंगल में दांवपेंच, रोमांचक कुश्ती मुकाबले से दर्शकों का मनोरंजन किया। खेल भावना से आपसी भाईचारा बढ़ता है। विजई पहलवानों को कमेटी द्वारा पुरस्कृत कर हौसला अफजाई की। दो दिवसीय मेला में दूर-दराज के पटरी रेहड़ी दुकानदार मनोरंजन खाद्य सामग्री, घरेलू सामग्री क्रय विक्रय कर महिलाएं बच्चे आनंद उठाते हैं। छोटे नन्हे मुन्ने बच्चों ने खेल का भी खूब आनंद उठाया। इस मेले से नई ऊर्जा मिलती है। देररात सांस्कृतिक कार्यक्रम नृत्य का आयोजन किया जाता है। इस मेले में आसपास सहित दूधराज के लोग आकर एक दूसरे के विचारों व संस्कृति से रूबरू होते हैं। यह परंपरा बालामऊ गांव में लगभग वर्षो से चली आ रही है। शांति व्यवस्था के लिए प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार की टीम पूरी तरह से मुस्तैद रही।
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