दहेज मृत्यु के मामले में न्यायालय ने सुनाई 10 वर्ष के कठोर करावास की सजा, मामला थाना विजयपुर का
गुना (आरएनआई) अपर लोक अभियोजक राकेश व्यास ने बताया कि दिनांक 28/06/2023 को 03:15 बजे मृतिका सुनीताबाई अहिरवार निवासी पालिका बाजार एनएफएल विजयपुर को फांसी लगने के कारण मृत अवस्था में शासकीय अस्पताल लाया गया मार्ग इंटीमेशन की सूचना जिला अस्पताल गुना द्वारा एक लेखीय तहरीर क्रमांक - 100 दिनांक 28 /06/2023 लाकर प्रस्तुत की गई और सूचना के आधार पर से अकाल मृत्यु एवं आकस्मिक मृत्यु के अनुसार धारा 174 दंड प्रक्रिया संहिता का मार्ग क्रमांक 116 / 23 लेख किया गया उक्त मार्ग को एसडीएम गुना को सूचनार्थ प्रेषित कर असल कायमी हेतु आरक्षी केंद्र विजयपुर भेजा गया।
जो थाना विजयपुर के अलस मर्ग क्रमांक 15 / 23 धारा 174 जा. फौ. पर दर्ज किया गया जिसकी जांच एसडीओपी राघौगढ़ जी डी शर्मा द्वारा की गई जांच में साक्षीगण रमेश मृतका की मां कमलाबाई मृतका की बहन के कथन लेख किए गए । साक्षीगण ने अपने कथनों में मृतिका सुनीता बाई के पति हेमराज अहिरवार ससुर मानसिंह अहिरवार सास संपत बाई अहिरवार देवर रितेश अहिरवार देवरानी पूनम अहिरवार एवं नंनद सुनीता अहिरवार के द्वारा दहेज की मांग को लेकर शादी के बाद से ही मारपीट करना शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना देना बताया गया इसी मारपीट एवं प्रताड़ना से तंग आकर मृतिका सुनीता बाई द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किया जाना बताया । संपूर्ण मार्ग जांच उपरांत एवं साक्षीगानों के कथन के आधार पर पाया गया कि मामला दहेज हत्या की श्रेणी का है जो धारा 304 वी, 306, 498 ए ,भा द वि का घटित होना पाया गया अपराध विजयपुर थाना क्षेत्र का होने से आरोपीगण के विरुद्ध थाना विजयपुर के अपराध क्रमांक 117 / 23 धारा 304 वी, 306 ,498 ए, भा द वि की प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की गई एवं अपराध का अनुसंधान प्रारंभ किया गया आरोपीगण को गिरफ्तार किया गया अनुसंधान में मौका नक्शा , जप्ती एवं साक्षीगणों के कथन लेखबद्ध किए गए अपराध आरोपीगण के विरुद्ध सिद्ध पाए जाने पर अभियोग पत्र अधिनस्थ न्यायालय में प्रस्तुत किया गया प्रकरण सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होने से प्रकरण को कमिट कर सत्र न्यायालय भेजा गया । जो अपर सत्र न्यायाधीश महोदय राघौगढ़ के सत्र प्रकरण क्रमांक 57 / 23 पर दर्ज किया गया। प्रकरण में आरोप पत्र विरचित कर प्रकरण का विचारण प्रारंभ किया गया प्रकरण के विचारण के दौरान अभियोजन ने प्रकरण के समर्थन में 14 साक्षीगण के कथन न्यायालय में लेखबद्ध करायें एवं 22 दस्तावेज न्यायालय में प्रदर्शित करायें अभियोजन न्यायालय में अभियोजन की कहानी के अनुरूप अपने प्रकरण को साक्षीगणों कथन एवं दस्तावेजी साक्ष्य के माध्यम से प्रमाणित करने में सफल रहा बचाव पक्ष एवं अभियोजन पक्ष के तर्कों को श्रवण करने के बाद न्यायालय ने आरोपीगण मानसिंह अहिरवार ,हेमराज अहिरवार एवं संपत बाई अहिरवार को धारा 304 वी , 498 ए ,एवं धारा 3/4 पदहेज प्रतिषेध अधिनियम में दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम करवा एवं 6-6 हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किए जाने की सजा सुनाई शासन की और से पैरवी राकेश व्यास अपर लोक अभियोजक द्वारा की गई।
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