थाने पहुंचे फरियादी गौवंश, फसल चौपट होती देख परेशान किसानों ने सडक़ों पर उतारी व्यथा
गौशाला बोली- जगह नहीं, किसान बोले, तो थाने में रख लो!
गुना (आरएनआई) रविवार को शहर में उस वक्त अजीब लेकिन चिंतनशील नजारा देखने को मिला, जब आधा सैकड़ा से अधिक आवारा गौवंश थाने के सामने ऐसे खड़े दिखे मानो किसी शिकायत को लेकर खुद ही फरियादी बन गए हों। यह दृश्य कैंट थाने के सामने का था, जहां दर्जनों ग्रामीण अपने साथ गौवंश लेकर पहुंचे और प्रशासन से राहत की गुहार लगाई। पूरा मामला गुना से लगे ग्राम पिपरिया, चक, चौरोल और घोरा का है, जहां खेतों में बेखौफ घूम रहे आवारा मवेशियों ने किसानों की नींद उड़ा दी है। खेत में पनप रही फसलें चर जाने की घटनाएं आम हो चुकी हैं, और किसान अब अपने परिवार का पेट पालने को लेकर चिंतित हो उठे हैं। परेशान ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेते हुए करीब 60 से 70 मवेशियों को एकत्र कर उन्हें गुना शहरी क्षेत्र की कैंट गौशाला में पहुंचाया।
लेकिन यहां आकर उन्हें और भी मुश्किल का सामना करना पड़ा। गौशाला प्रबंधक ने साफ शब्दों में यह कहते हुए मवेशियों को लेने से मना कर दिया कि गौशाला में जगह नहीं है। इतना ही नहीं, कथित तौर पर यह भी कहा गया कि यदि कहीं और नहीं ले जा सकते तो इन मवेशियों को बाजार में छोड़ दो। यह सुनकर ग्रामीण आक्रोशित हो उठे और मवेशियों को लेकर सीधे कैंट थाने पहुंच गए। यहां दर्जनों मवेशी और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई, जिससे सडक़ पर जाम की स्थिति बन गई। राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन भीड़ का कारण जानकर हर कोई हैरान था ये फरियादी इंसान नहीं, बल्कि गौवंश थे।
मौके पर पहुंचीं प्रभारी सीएमओ एवं डिप्टी कलेक्टर मंजुषा खत्री ने स्थिति को संभालते हुए ग्रामीणों से चर्चा की और समझाइश दी। इसके बाद प्रशासन की पहल पर सभी मवेशियों को बिलोनिया स्थित गौशाला में स्थानांतरित किया गया, जहां उन्हें सुरक्षित रूप से रखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या से सालों से जूझ रहे हैं। गांव में कोई गौशाला नहीं है, जिसके चलते मवेशियों को इधर-उधर भटकने के लिए छोडऩा मजबूरी बन चुका है। सरपंच और ग्रामीण मिलकर कई बार प्रशासन से गौशाला की मांग कर चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा। ग्रामीण शिवकुमार रघुवंशी ने बताया कि ग्रामीणों ने अपने घर-घर जाकर 60 से 70 हजार रुपए चंदे के रूप में इक_ा किए ताकि मवेशियों के लिए भूसे और देखरेख की व्यवस्था की जा सके। लेकिन फिर भी गौशाला प्रबंधन ने मदद से हाथ खींच लिया। बहरहाल थाने के बाहर खड़े ये मौन फरियादी मवेशी हमारे सिस्टम से कई सवाल कर रहे थे, जिनका उत्तर अब प्रशासन को नीतिगत और स्थायी हल के रूप में देना होगा। ग्रामीणों की मांग है कि उनके गांवों में स्थायी गौशाला की स्थापना की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
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