जमीनी विवाद में न्याय न मिलने से किसान ने जनसुनवाई में खाया जहर, जिला अस्पताल में भर्ती

Tuesday, December 9, 2025 - 22:04
Updated: 9 months ago
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जमीनी विवाद में न्याय न मिलने से किसान ने जनसुनवाई में खाया जहर, जिला अस्पताल में भर्ती

गुना (आरएनआई) जिले के म्याना थाना क्षेत्र से मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे एक किसान ने न्याय न मिलने से हताश होकर कलेक्टोरेट परिसर में ही जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे पूरे प्रशासनिक अमले में हडक़ंप मच गया। तत्काल ड्यूटी पर मौजूद जवानों ने किसान को पकडक़र पानी पिलाया और उल्टी कराने की कोशिश की। इसके बाद उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। ग्राम सागोरिया निवासी अर्जुन सिंह ढीमर (40) पिछले चार वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन के मामले में न्याय की गुहार लगा रहे थे।

 सूत्रों के अनुसार, अर्जुन ढीमर लंबे समय से अपने आवेदन लेकर कलेक्टोरेट के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन समाधान नहीं होने से वे मानसिक रूप से परेशान थे।
दबंगों ने कर रखा था बलपूर्वक कब्जा अर्जुन सिंह ढीमर ने 28 अक्टूबर 2025 को पुलिस अधीक्षक को दिए एक आवेदन में अपनी पूरी परेशानी बताई थी। उन्होंने उल्लेख किया था कि वह वृद्ध हैं और दमा रोग से पीडि़त हैं, उनका एक पुत्र भी विकलांग है। उनकी स्वामित्व और आधिपत्य की कृषि भूमि सर्वे क्र. 315/17/2, रकबा-0.836 हेक्टर पर गांव के दबंग भू-माफिया लालाराम, हरिचरण और हरिओम धाकड़ ने बलपूर्वक कब्जा कर लिया है और उन्हें खेती करने से रोक रहे हैं। अर्जुन ढीमर ने बताया था कि उन्होंने न्यायालय तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड गुना के न्यायालय में स्वत्व घोषणा एवं स्थाई निषेधाज्ञा हेतु वाद पत्र प्रस्तुत किया है, जिस पर न्यायालय ने 19 सितंबर 25 को स्थगन आदेश भी पारित किया था, लेकिन दबंग भू-माफिया न्यायालय के आदेश को भी नहीं मान रहे थे।

जान से मारने की मिली थी धमकी
किसान ने आरोप लगाया था कि जब भी वह अपनी भूमि पर जाते थे, तो अनावेदकगण उन्हें माँ-बहन की गंदी गालियाँ देते थे और लाठी-डंडे लेकर जान से मारने के लिए आते थे। दबंगों ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर तूने इस भूमि पर पैर रखा तो तेरे दोनों पैर काट देंगे और तुझे जान से खत्म कर इसी भूमि पर गाढ़ देंगे। अर्जुन ढीमर ने 4 अक्टूबर को म्याना थाने में भी लिखित आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अर्जुन सिंह का आरोप था कि दबंग अपनी राजनीतिक पहुंच और पैसे का रुतबा दिखाकर कहते थे कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। दर-दर भटकने और कहीं सुनवाई न होने से आहत होकर ही उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस अमले में हडक़ंप मच गया है।

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