'जज के लिए सजा या बरी होना नहीं, न्याय होना सबसे अहम'— जस्टिस जीएस अहलूवालिया

Jul 18, 2026 - 22:17
Jul 18, 2026 - 22:49
 0  0
'जज के लिए सजा या बरी होना नहीं, न्याय होना सबसे अहम'— जस्टिस जीएस अहलूवालिया

न्याय की यह परिभाषा एमपी हाई कोर्ट ग्वालियर बेंच के प्रशासनिक जज जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने गुना सेशन कोर्ट में आयोजित डिजिटल रिकॉर्ड रूम मैनेजमेंट सिस्टम की शुरुआत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कही।

कार्यक्रम में पोर्टफोलियो जज जस्टिस अनुराधा शुक्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। वहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्र, कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल, SP हितिका वासल, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपनारायण सोलंकी, सचिव श्यामसुंदर लिटौरिया मंचसीन रहे।

हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच के एडमिनिस्ट्रेटिव जज जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा एक सुस्थापित वाक्य है कि न्यायप्रणाली में बार और बेंच एक रथ के दो पहिए हैं। इसमें एक चीज और जोड़ना चाहते हैं। हम बार और बेंच की पहिए तो मान लेते हैं, लेकिन एक्सेल कहां है। एक्सेल की प्रभावी भूमिका न्यायिक कर्मचारी निभाते हैं।

प्रशासनिक जज ने कहा कि विवेचना अधिकारी को अपने केस के निर्णय को पढ़ना चाहिए कि उस केस में सजा क्यों मिली या आरोपी बरी क्यों हुआ। इससे उसे समझ में आएगा कि केस में उसकी विवेचना में क्या कमी रह गई। कनविक्शन से आदमी सुधारता नहीं है, उसके हृदय परिवर्तन से जरूर सुधरता है।

पुलिस अपनी इमेज से हटकर समाज के लिए जो काम कर रही है, उनका मानवीय चेहरा भी हमे देखना चाहिए। उन्हें प्रोत्साहित भी करना चाहिए। यह प्रयास रहेगा कि ये जो सॉफ्टवेयर गुना से शुरू हुआ है, ये पूरे प्रदेश में अपनी खुशबू पहुंचाए।उल्लेखनीय है कि एसपी मैडम ने अपने अग्रेजी में दिए भाषण में कहा कि हम किसी कंजर-पारदी पर बेवजह केस नहीं लगा रहे हैं!

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0