ग्वालियर दाल बाजार और सफेदपोश सटोरिये
शिवपुरी, गुना (आरएनआई) यह तो साफ है कि ग्वालियर का दाल बाजार अब किराना और मसालों के व्यापार के लिए नहीं, बल्कि सट्टे के अड्डे के रूप में कुख्यात होता जा रहा है। खुलेआम इलायची, डोड़ा और हल्दी जैसी जिंसों पर अवैध सट्टा खेला जा रहा है और प्रशासन अभी तक सिर्फ "आवेदन प्राप्त होने" का इंतजार कर रहा है! क्या पुलिस को इस गोरखधंधे की खबर नहीं थी? या फिर कोई ऊपर तक मिलीभगत का खेल चल रहा है?
बड़े व्यापारी मजे में हैं, दलाल करोड़ों कमा रहे हैं, और छोटे व्यापारी बरबादी के कगार पर पहुंच गए हैं। जबरदस्ती सट्टे के खेल में घसीटे गए ये व्यापारी या तो कर्ज में डूब रहे हैं या फिर बाजार से बाहर होने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि आखिर ग्वालियर पुलिस अब तक सो रही थी? क्या प्रशासन तब जागेगा जब लोग आत्महत्या करने लगेंगे या फिर दाल बाजार में आगजनी होगी? शिवपुरी, गुना, अशोकनगर तक इस अवैध सट्टे की जड़ें फैल चुकी हैं। अगर तुरंत ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह पूरे मध्यप्रदेश के व्यापार को जकड़ लेगा। व्यापार की आड़ में चल रहे इस सट्टे का सीधा असर जनता की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि कृत्रिम तरीके से कीमतें बढ़ाकर महंगाई भी बढ़ाई जा रही है। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन वास्तव में कार्रवाई करेगा या हमेशा की तरह चंद गिरफ्तारियां दिखाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगा? यदि सरकार और पुलिस सच में गंभीर हैं, तो इन सफेदपोश सटोरियों और उनके राजनीतिक संरक्षकों के नाम उजागर किए जाएं और इन्हें जेल भेजा जाए। वरना यह स्पष्ट हो जाएगा कि ग्वालियर का दाल बाजार सिर्फ मसालों के लिए ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के लिए भी जाना जाएगा.
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