गोवा नाइट क्लब हादसा: मृतक मजदूरों के परिवार बोले — बेरोजगारी ने मौत के मुंह में धकेल दिया
गोवा (आरएनआई) — गोवा के अर्पोरा में नाइट क्लब में लगी भीषण आग में असम के तीन श्रमिकों की मौत के बाद, उनके परिजनों ने कहा है कि उनकी जान केवल भाग्य या हादसे की वजह से नहीं गई, बल्कि बेरोजगारी और जीविकोपार्जन की मजबूरी ने उन्हें संकट में धकेल दिया। मृतकों में कछार जिले के मनोजीत मल, राहुल तांती तथा धेमाजी जिले के दिगंत पातिर शामिल थे।
परिवारों ने बताया कि उनके क्षेत्र में रोज़गार के पर्याप्त अवसर नहीं थे, इसलिए उनके बच्चे — बेहतर कमाई की तलाश में — गांव छोड़कर गोवा या केरल जैसे दूरदराज़ राज्यों में काम करने पहुंचे थे। वहीं, चाय-बागान आधारित बराक घाटी क्षेत्र की आर्थिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार-अभाव ने उन्हें मजबूरन ऐसे काम स्वीकारने पर विवश कर दिया।
नाइट क्लब में रसोई और अन्य कार्यों के लिए बुलाए गए इन मजदूरों ने अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी चलाने के लिए यह जोखिम उठाया, लेकिन क्लब चेन की लापरवाही और अग्नि सुरक्षा मानकों को अनदेखा करने से उनकी जान चली गई। मृतकों के परिजनों का कहना है कि अगर गांवों में रोजगार के अवसर होते, तो वे अपने घरों में होते; उन्हें इतनी दूर नौकरी के लिए निकलना नहीं पड़ता।
इसी बीच, असम के मुख्यमंत्री ने इस दुखद घटनाक्रम पर शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि यह हादसा केवल निजी त्रासदी नहीं, बल्कि उन सिस्टमिक असमंजसों का भी परिणाम है — जहाँ लोग रोजगार हेतु मजबूरन दूर चले जाते हैं, व अपने परिवारों और जीवन की कीमत चुकाते हैं।
परिवारों ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि उनके बच्चों के शवों को घर पहुँचाने और उचित मुआवजा दिलाने में मदद की जाए। वहीं, यह घटना उन लाखों प्रवासी श्रमिकों की त्रासदी की याद दिलाती है, जो बेहतर आजीविका की तलाश में अपने गांवों को छोड़कर दूर-दूर चले जाते हैं, और अपने जीवन को अनिश्चितता के हवाले कर देते हैं।
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