गुनिया बचाओ अभियान ठंडा, अतिक्रमणियों का सिंडिकेट फिर सक्रिय
एमपी (आरएनआई) गुनिया नदी उत्थान का अभियान आखिरकार दम तोड़ता सा दिखाई दे है। अब न गुनिया मैया की आरती हो रही। न ही सुबह सफाई के पहले और शाम को सफाई के बाद की स्थिति के तुलनात्मक फोटो सामने आ रहे। न ही कहीं अतिक्रमण हटाती जेसीबी या पोकलेन मशीन दिखाई दे रही। बता रहे हैं कि नदी के बहाव क्षेत्र के दोनों ओर 30 - 30 मीटर तक सीमा स्पष्ट करने के लिए जिन जगहों पर वन विभाग के सहयोग से सीमेंट के पोल लगाए गए थे, उनको भी भू-खोरों ने कई जगह हटा दिया है।
गुनिया बचाओ अभियान के ठंडा पड़ने से आमजन में कई तरह की चर्चाएं हैं। लोगों को कहने का अवसर मिल रहा है कि भू माफिया का सिंडिकेट फिर हावी हो गया है। और इतना हावी हो गया है कि क्षेत्र के लोकप्रिय सासंदज्योतिरादित्य सिंधिया के अतिक्रमण हटाकर शहर का भविष्य सुरक्षित करने के लोक कल्याणकारी संकल्प की सिद्धि में तक बाधा बन गया है।
जबकि, आमजन अतिक्रमण हटाने,अवैध कॉलोनियों पर कार्यवाही की मुहीम और सौंदर्यीकरण के समर्थन में है। इस मुहिम से तकलीफ सिर्फ अतिक्रमण करने वालों और उनके संरक्षकों को है, जिनकी गिनती उंगलियों पर की जा सकती है। नदी नालों में इन अतिक्रमणों के कारण इस बार बाढ़ का पानी शहर में घुसा और कईयों की गृहस्थी उजाड़ गया था। निजी अतिक्रमण के अलावा प्रशासन के सामने गुनिया के 30 मीटर के आरक्षित क्षेत्र में बने तमाम सरकारी निर्माण भी चुनौती हैं। जिनमें एमपीईबी ऑफिस का हिस्सा, पीएम आवास, फिल्टर प्लांट आदि शामिल हैं।
इसके अलावा मुहिम के शुरुआत में जिन अतिक्रामकों द्वारा कोर्ट से स्टे लिया गया अभी तक उनके प्रकरण में कोर्ट में प्रशासन की ओर से ठोस और तथ्यात्मक ढंग से पक्ष रखने की फिलहाल तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है। अंदर खाने चर्चा है कि कुछेक अधिकारियों ने ही उनको शह दी है कि अतिक्रमण कर अट्टालिकाएं तान चुके प्रभावी लोग कोर्ट से डिक्री करा लें, ताकि कहने हो जाए कि कोर्ट का फैसला उनके फेवर में है अब हम कुछ नहीं कर सकते।
कानून के जानकार जानते हैं कि अनेक सरकारी वकील कोर्ट में किस तरह से शासन का पक्ष रखते हैं। फिर यदि उन्हें फीडबैक ही कमजोर दिया जाएगा तो क्या होगा। इस दिशा में जब तक लोकल लेबल पर कानूनी जानकारों की टीम, अतिक्रामकों के द्वारा लगाए जाने वाले केसों की मॉनिटरिंग कर ठोस कानूनी जवाब तैयार नहीं करेगी तब तक इस नूराकुश्ती में अतिक्रामकों के जीतने की संभावना बनी रहेगी।
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। उम्मीद है कि वो गुनिया नदी समेत शहर के अतिक्रमण, नदी नालों से अवैध कब्जे हटाने के साथ अवैध कॉलोनियों के अभियान को फिर से न सिर्फ गति देंगे बल्कि अभियान को परिणाम तक भी पहुंचाएंगे।
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