गुना में स्मार्ट मीटरों को लेकर बढ़ा जनविरोध: "ईमानदार उपभोक्ता परेशान, चोर बेखौफ", विभाग पर अविश्वास की हवा तेज

Jul 11, 2025 - 12:11
Jul 11, 2025 - 12:14
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गुना (आरएनआई) स्मार्ट मीटर का विरोध सिर्फ इसलिए हो रहा है कि बिजली विभाग जनता का विश्वास अर्जित नहीं कर पाया। इसलिए जनता को लग रहा है कि स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली कंपनी उनसे घाटा पूरा करेगी। वह घाटा जो रसूखदारों, नेताओं, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों द्वारा बिजली चोरी कर बिजली कंपनी को दिया जाता है। जिसे वसूलने की हिम्मत कंपनी में होती नहीं है।

चोरी छुपे और बिजली का बिल न भरकर भी बिजली जला रहे तत्वों के विरुद्ध विभाग ने कभी सख्ती नहीं दिखाई। कुछ बकायादारों के नाम जरूर छोटे छोटे अक्षरों में एक बोर्ड पर लिखकर जयस्तंभ चौराहे पर बोर्ड लगाया था। एक दो बकायादारों के शस्त्र लाइसेंस निलंबित किए थे लेकिन उससे बेशर्म चोरों पर कोई ज्यादा फर्क पड़ा हो, लगता नहीं है।

जबकि ईमानदारी से बिल भरकर और डर डर कर बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ता को कभी कोई समस्या आई या त्रुटिपूर्ण बढ़ा हुआ बिल आया तो उसके हिस्से बिजली दफ्तर के चक्कर ही आए हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ कि उनकी समस्या हाथों-हाथ सुलझी हो। ये बिजली कंपनी के दफ्तर का एक सामान्य व्यवहार बन चुका है, जिससे उपभोक्ता तंग है और उसमें पहले से ही निराशा और क्षोभ है।

ऊपर से कुछ स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियां सरेआम पकड़ी ही जा रहीं हैं। जाहिर है कि ऐसे मीटर गहन जांच के बिना ही लगाए जा रहे हैं। घर में पुराना मीटर उखाड़कर नया मीटर लगाने वाले मजदूर भी अनाड़ी हैं जिन पर आईटीआई जैसा कोई डिप्लोमा तक नहीं है। कुछ लड़के तो बिल्कुल नौसिखिया हैं।

चूंकि अभी विरोध का माहौल है, इसलिए स्मार्ट मीटर से अप्रत्याशित रूप से बढ़े हुए बिल आने पर अफसर थोड़ा बहुत सुन भी रहे हैं। वरना यही अफसर स्मार्ट मीटर की रीडिंग को सही और उपभोक्ता को चोर बताकर मीटर काटने की धमकी देते।

और अंत में परेशान उपभोक्ता ठगा सहमा सा इधर उधर घूमकर न्याय न मिलने पर यही कहता कि साहब मैं चोर नहीं हूं, लेकिन एकसाथ इतने पैसे जमा नहीं कर सकता,, तब उसको कहा जाता कि तेरा प्रकरण लोक अदालत में लगा देते हैं। और वहां भी बिल की रीडिंग पर नहीं बल्कि पेनल्टी आदि पर ही छूट मिलती। पहले ऐसा होता रहा है। 

आज से 15 साल पहले मेरी कॉलोनी में बिजली विभाग के एक जेई की टीम ने आकर घर के बाहर लगे मीटर चैक किए थे। वो श्रीमान पूरी गली को ही चोर बताकर सभी पर हजारों रुपए की जुर्माना राशि लगा गए थे। तब हम लोगों ने इसका विरोध किया, सुनवाई नहीं हुई। फिर सभी ने अपने अपने सोर्सेस से सिफारिश करवा कर एमपीईबी की लैब में मीटर टेस्ट करवाए थे। आप जानकर हैरान होंगे कि सिर्फ एक मीटर को छोड़कर बाकी सभी सही पाए गए थे। चूंकि सभी ने सामूहिक लड़ाई लड़ी इसलिए न्याय मिला था।

लेकिन यदि किसी एक की पूंछ काटी गई होती तो संभव है कि बिजली विभाग की तरह ही पड़ोसी भी उसे बिजली चोर मान लेते। उसका साथ न देते और वो ईमानदार होकर भी चोर बताए जाने की ग्लानि से ग्रस्त रहता। 

स्मार्ट मीटर तो लगेंगे। पूरे देश में लग रहे हैं। लेकिन Dr Mohan Yadav Jyotiraditya M Scindia Collector Office Guna आप बिजली कंपनी के अफसरों और कर्मचारियों को जनता के प्रति संवेदनशील बनाइए। पूरी जनता चोर नहीं है। जो चोर हैं उनसे वसूली कराइए। लोगों के मन में स्मार्ट मीटर को लेकर शंका न रहे इसके लिए उन्हें विकल्प दीजिए कि वो बाजार से एक सब मीटर खरीदरकर लगवा सकते हैं। 

और सबसे बड़ी बात कि स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों से करवाइए, जहां बिजली की खपत और उसके बदले कम्पनी की आय में जमीन आसमान का अंतर रहता है। ऐसा होगा तो कंपनी पर विश्वास कायम रहेगा, वरना ये मीटर भविष्य में दिक्कत देगा।

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