गुना अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट ने दिए निर्देश, बिना अंतिम आदेश के नहीं होगी कार्रवाई

Sep 4, 2025 - 22:56
Sep 4, 2025 - 22:57
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गुना अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट ने दिए निर्देश, बिना अंतिम आदेश के नहीं होगी कार्रवाई

ग्वालियर/गुना (आरएनआई) गुनिया पर प्रशासन द्वारा चिन्हित अतिक्रमण के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता को दिए गए नोटिस के उत्तर पर अंतिम आदेश पारित करने से पहले कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जाए।

 कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस के संबंध में प्रस्तुत उत्तर में अंतिम आदेश पारित करने में याचिका बाधा नहीं बनेगी।

29 जुलाई को गुना में आई बाढ़ के बाद नदी नाले में अतिक्रमण में बने जिन निर्माणों को लाल रंग से क्रॉस का निशान लगाकर चिन्हित किया गया है। ऐसे ही एक निर्माण को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया है।

यह याचिका नदी मोहल्ला निवासी स्व. मोहम्मद आज़ाद खान के आश्रित श्रीमती सकीला बानो, शहजाद खान और ताज मोहम्मद के द्वारा कलेक्टर, सीएमओ नगरपालिका और शासन को प्रतिवादी बनाकर प्रस्तुत की गई है। इस याचिका WP No. 34585/2025 में 01 सितंबर को यह अंतरिम आदेश पारित कर पक्षकारों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नगरपालिका सीएमओ द्वारा 11 जुलाई 2025 के नोटिस के माध्यम से, याचिकाकर्ताओं को मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 223 और 187(8) के अनुसार उनके द्वारा किए गए निर्माण के संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। याचिकाकर्ताओं ने उक्त कारण बताओ नोटिस का उत्तर 17 जुलाई 2025 को प्रस्तुत किया, जो अभी भी लंबित बताया गया है।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रतिवादियों द्वारा दिनांक 11 जुलाई 2025 को दिए गए कारण बताओ नोटिस के उत्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। 24 अगस्त 2025 को प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ताओं की संपत्ति पर 'X' चिह्न लगा दिया है। याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि उनके द्वारा प्रस्तुत 17 जुलाई 2025 के उत्तर पर कोई विचार किए बिना ही उनके निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तक, एक अंतरिम उपाय के रूप में, प्रतिवादियों को निर्देशित किया कि जब तक याचिकाकर्ताओं द्वारा 17 जुलाई 2025 को प्रस्तुत, कारण बताओ नोटिस के उत्तर पर विचार नहीं किया जाता, तब तक याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि इस याचिका का लंबित रहना नगरपालिका सीएमओ के लिए याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत उत्तर दिनांक 17 जुलाई 2025 के पर अंतिम आदेश पारित करने में बाधा नहीं बनेगा। याचिका में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

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