कोडीन सिरप मामले में कार्रवाई की मांग पर विधानसभा में हंगामा, सपाइयों ने की नारेबाजी
लखनऊ (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। सत्र के पहले ही दिन समाजवादी पार्टी के विधायकों ने कोडीन कफ सिरप मामले को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसी बीच सदन में आज अनुपूरक बजट भी पेश किया जाना है।
सदन में समाजवादी पार्टी के नेता माता प्रसाद पांडेय ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मनमानी चल रही है और डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवाएं लिखने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब आदमी के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना था कि कई सरकारी अस्पतालों में एमआरआई मशीनें काम नहीं कर रही हैं और जांच के नाम पर मरीजों से भारी उगाही की जाती है।
कोडीन सिरप के मुद्दे पर बोलते हुए माता प्रसाद पांडेय ने सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए, लेकिन सरकार पूरे मामले पर जवाबदेही से बच न जाए।
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप से एक भी मौत नहीं हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस पूरे मामले पर सदन में विस्तृत और तथ्यात्मक जवाब देगी।
इससे पहले विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी के विधायकों ने परिसर में कोडीन कफ सिरप मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
इधर, विधानसभा के प्रधान सचिव प्रदीप दुबे ने दोनों सदनों को श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट विधेयक, 2025 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विधेयक उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद दोनों से पारित हो चुका है और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे अधिनियम के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। इस कानून का उद्देश्य मंदिर की धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए प्रशासन में पारदर्शिता लाना और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सदन में मौजूद समाजवादी पार्टी नेता माता प्रसाद पांडेय ने अनुपूरक बजट पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान सरकार को अनुपूरक अनुदान लाने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि सदन में यह चर्चा होनी चाहिए कि सरकार किस उद्देश्य से ये सप्लीमेंट्री ग्रांट मांग रही है और जनता के हित में इनका उपयोग कैसे किया जाएगा।
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