कॉन्स्टिट्यूशन क्लब चुनाव: अमित शाह खेमे की चुनौती ध्वस्त, राजीव प्रताप रूडी की एकतरफा जीत
नई दिल्ली (आरएनआई) कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के प्रतिष्ठित चुनाव में भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने एक बार फिर सचिव पद पर शानदार जीत हासिल की। इस चुनाव को साधारण क्लब चुनाव मानना भूल होगी, क्योंकि इसके मतदाताओं में सांसद, पूर्व सांसद और वरिष्ठ नौकरशाह शामिल हैं—यानी देश के सबसे प्रभावशाली चेहरों का सीधा दांव यहां लगता है।
रूडी की इस बार की चुनौती कोई मामूली नहीं थी। गृहमंत्री अमित शाह के करीबी और मोदी सरकार में मंत्री रह चुके पूर्व सांसद संजीव बालियान ने मैदान में उतरकर उनके वर्षों पुराने दबदबे को चुनौती दी। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि बालियान को भाजपा नेतृत्व का मौन समर्थन हासिल था और यह मुकाबला केवल क्लब की दीवारों तक सीमित नहीं, बल्कि पार्टी के अंदरूनी समीकरणों से भी जुड़ा था।
सूत्रों के अनुसार, रूडी को मोदी-शाह खेमे का हिस्सा न माना जाना उनके मंत्री न बनने की एक बड़ी वजह है, जबकि बालियान शाह के विश्वासपात्र माने जाते हैं। यही नहीं, शाह के एक और करीबी सांसद निशिकांत दुबे ने चुनाव में खुलकर बालियान का समर्थन किया और रूडी के कार्यकाल पर सवाल उठाए। बावजूद इसके, विपक्षी दलों का अप्रत्याशित और एकतरफा समर्थन रूडी के पक्ष में गया, जिसने पूरे समीकरण बदल दिए।
चुनाव नतीजे ने साफ कर दिया कि विपक्ष ने इस मौके का इस्तेमाल भाजपा नेतृत्व को अप्रत्यक्ष मात देने के लिए किया। रूडी की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि गैर-राजनीतिक चुनाव में अति-राजनीतिकरण हमेशा कामयाब नहीं होता।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम भाजपा के भीतर बढ़ती खींचतान और सत्ता पक्ष के सामने उभरती नई चुनौतियों का संकेत है। फिलहाल, राजीव प्रताप रूडी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अनुभव, व्यवहारिकता और संतुलन—हर समीकरण में भारी पड़ सकते हैं।
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