केंद्र सरकार ने बढ़ाई सरकारी आवास की लाइसेंस फीस, 1 जुलाई से लागू हुई नई दरें
केंद्र सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को आवंटित सरकारी आवासों की मासिक लाइसेंस फीस में वृद्धि कर दी है। शहरी विकास मंत्रालय के एस्टेट निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। यह शुल्क आवास के किराए से अलग लिया जाता है और इसका भुगतान सभी पात्र आवंटियों को करना होगा।
मंत्रालय के अनुसार, जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन (GPRA) नियम, 2017 के तहत लाइसेंस फीस में लगभग 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। वहीं, जीपीआरए हॉस्टल में रहने की सुविधा के लिए लाइसेंस फीस में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे पहले सरकारी आवासों की लाइसेंस फीस में संशोधन 1 जुलाई 2023 को किया गया था।
नई व्यवस्था के तहत टाइप-1 आवास की लाइसेंस फीस 210 रुपये से बढ़ाकर 230 रुपये, टाइप-2 की 440 रुपये से 490 रुपये, टाइप-3 की 660 रुपये से 740 रुपये, टाइप-4 की 880 रुपये से 980 रुपये और टाइप-4 स्पेशल की 930 रुपये से बढ़ाकर 1,040 रुपये कर दी गई है।
इसी तरह टाइप-6ए की लाइसेंस फीस 2,170 रुपये से बढ़ाकर 2,430 रुपये, टाइप-6बी की 2,590 रुपये से 2,900 रुपये, टाइप-7 की 3,040 रुपये से 3,400 रुपये और टाइप-8 की 5,430 रुपये से बढ़ाकर 6,070 रुपये कर दी गई है।
इसके अलावा, सर्वेंट क्वार्टर की लाइसेंस फीस 90 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये और गैरेज की लाइसेंस फीस 60 रुपये से बढ़ाकर 70 रुपये कर दी गई है।
सरकार के अनुसार, संशोधित शुल्क जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन नियमों के अनुरूप तय किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो चुकी हैं और अब सरकारी आवासों के सभी पात्र आवंटियों पर यही लाइसेंस फीस लागू होगी।
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