किसानों के गंभीर मुद्दों पर विधायक ऋषि अग्रवाल ने सदन में सरकार की आंखें खोलने का किया प्रयास

Dec 2, 2025 - 21:25
Dec 2, 2025 - 21:26
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गुना (आरएनआई) विधायक ऋषि अग्रवाल ने विधानसभा सदन में किसानों की हित की बात रखते हुए कहा - मैं गुना जिले की बमोरी विधान सभा से आता हूं. गुना जिले में इस मानसून सीज़न में खरीफ का सीज़न था, उसमें सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई. खेतों में अधिक नमी होने के कारण, अधिक पानी का भराव होने के कारण, फसलों में भारी मात्रा में नुकसान भी आया है. हमारे यहां धान सोयाबीन मक्के की फसल वोई जाती है . अधिक नुकसान होने के कारण किसान भी बहुत परेशान हैं. अभी सदन में कई सम्माननीय सदस्य बात कर रहे थे कि कई जिलों में मुआवजा राशि का वितरण हुआ लेकिन मैं आपको यह जरूर कहना चाहूंगा कि गुना जिले की बमोरी विधान सभा में और गुना जिले में जो आरबीसी 4-6 के नियम के तहत मुआवजे का न तो कोई निर्धारण हुआ है और न ही कोई वितरण हुआ है. जैसे, तैसे किसानों ने अपनी नुकसान के बाद फसल सभांली, किसानों को मक्का की फसल में काफी नुकसान हुआ. जैसे तैसे उन्होंने फसल संभाली तो केन्द्र सरकार ने घोषणा करी की मक्के का जो समर्थन मूल्य है 2400 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों की मक्का समर्थन मूल्य पर खरीदी जायेगी., लेकिन किसान को हताशा जब हुई जब उसके साथ बहुत बड़ा छलावा हुआ कि मध्य प्रदेश में मक्का की फसल की खरीदी समर्थन मूल्य पर चालू ही नहीं हुई. अब मैं रबी सीजन की फसल पर आऊंगा, उन्होंने जैसे तैसे रबी फसल की तैयारी करी, जैसे-तैसे उधारी करके कर्ज लेकर किसान रबी सीजन की फसल के लिये मरता क्या न करता वाली स्थिति में उसने रबी सीजन की फसल की तैयारी शुरू करी , बुवाई का समय आया तो किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं हुआ, ना तो सोसायटी के माध्यम से हुआ और न ही मार्कफेड की मार्केटिंग की सोसायटियों से हुआ. मैं सरकार से यह जरूर पूछना चाहता हूं कि सरकार एक तरफ बोलती है कि पर्याप्त मात्रा में खाद, डीएपी उपलब्ध है . दूसरी तरफ सोसाटियों में और मार्कफेड के जो गोदाम हैं उनमें खाद उपलब्ध नहीं है. किसान लम्बी-लम्बी लाइनों में लगा हुआ है. आखिर खाद उपलब्ध होता तो लम्बी-लम्बी लाइनें क्यों लगती. किसान 1350 की जो बोरी है, वह 1800 और 2000 रूपये तक ब्लैक में खरीदने के लिये बाध्य क्यों होता है. किसान खाद के बदले गाली क्यों खाता,  किसान खाद के बदले डण्डे क्यों खाता,  यह बहुत बड़ा प्रश्न है. अभी मेरे यहां यूरिया का बहुत बड़ा संकट चल रहा है. किसान की बोवनी हो गयी और उसका पहला पानी चल रहा है. तो उसको पर्याप्त मात्रा में यूरिया चाहिये . हमारे यहां पहले पानी में यूरिया का छिड़काव करते हैं.
फसलों में यूरिया देते हैं. यूरिया फेंकते हैं. यूरिया का इतना भयंकर संकट है कि रात रात भर इतनी भारी ठण्ड में खुले आसमान के नीचे किसान गोदामों के बाहर सो रहा है. उसको न तो वहां कोई सुविधा है और भूखा प्यासा किसान वहां पर सोने के लिये मजबूर है, क्योंकि सुबह से उसको 4.00 बजे से फिर से लाइनों में लगना है. एक बहुत संवेदनशील मुद्दा है. बागेरी खाद वितरण केन्द्र जो मेरी विधानसभा में आता है. 26,/27/ की रात दरमियान वहां पर लाइन में लगी हुई एक आदिवासी सहरिया समाज की महिला भुरिया बाई जो अपने जीवन यापन के लिये अपनी खेती के लिये खाद लेने के लिये लाइन में पिछले 2-3 दिनों से खड़ी थी. उसकी तबियत बिगड़ी और उसको जब हास्पीटल ले जाया गया, तो उसको मृत घोषित कर दिया. यह बहुत बड़ा प्रश्न है कि अगर खाद की कमी नहीं है, तो उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है. इस आदिवासी महिला की मौत का जिम्मेदार कौन है. उस महिला को आज दिनांक तक कोई भी मुआवजा राशि का भी वितरण नहीं हुआ. तो यह बहुत बड़ा मुद्दा है कि उसको आज दिनांक तक मुआवजा राशि का वितरण क्यों नहीं हुआ. मैं तो आपके माध्यम से सरकार से मांग करना चाहूंगा कि कम से कम उस महिला को 5 लाख रुपये मुआवजा राशि का वितरण होना चाहिये., मेरी विधान सभा क्योंकि ग्रामीण है, कृषि वहां का मुख्य काम है,. मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की 10 घण्टे वे किसानों को बिजली उपलब्ध करवायेंगे, वह भी दिन में, लेकिन हमारे यहां किसान इतना सहनशील है कि वह रात में भी पानी देने के लिये तैयार है, परन्तु उसे 10 घण्टे तो क्या 6-7 घण्टे पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलती है. जो वहां गुना में बरसों से जमे हुए बिजली विभाग के अधिकारी हैं, उन्होंने इतना भ्रष्टाचार मचा रखा है, उन्होंने किसानों का इतना शोषण कर रखा है कि उनके कारण से वह लोग बिजली उनको पर्याप्त नहीं मिल रही है. हमारा किसान कुछ नहीं मांगता है, सिर्फ उसे सरकार से पानी, बिजली और खाद चाहिये. इसके अलावा कुछ नहीं मांगता है. मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि मध्यप्रदेश में जो किसान हैं, वह मध्यप्रदेश की मजबूत रीढ़ की हड्डी है. अगर हम किसान की चिंता नहीं करेंगे, तो हमारा मध्यप्रदेश कैसे फल फूल सकता है।: विधायक ऋषि अग्रवाल

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