काजीपुर शरीफ में इमामे हुसैन की सजी महफिल, अकीदतमंदों की जुटी भारी भीड़
खागा, फतेहपुर (आरएनआई) जिकरे सैयदुश्शोहदा काजीपुर शरीफ आस्ताने नवाबिया काजीपुर शरीफ में पीरे तरीकत सूफी सय्यद मुहम्मद नूरुल हसन नूर मियां की सरपरस्ती में बड़ी ही शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया। जिसमें शायरों ने बहुत ही शानदार कलाम पेश किए। इमाम हुसैन की शहादत बयान की गई।
कानपुर से आए हुए मौलाना मुहम्मद जकरिया ने बहुत शानदार खेताब किया। दौराने तकरीर ये भी कहा कि सय्यद नूर मियां इमाम हुसैन की औलाद में से हैं। इनसे मुरीद होने वाला कभी गुमराह नहीं होगा। प्रतापगढ़ के मौलाना आसिफ रजा सैफी ने प्रोग्राम का संचालन किया। दौराने संचालन इमाम हुसैन की शान में शेर पढ़ा-हक तो ये है कि तन्हा तू बहत्तर की तरह है, अब्बास तेरा नाम भी लश्कर की तरह है, बेटा ही नहीं बेटी भी ए शाम के हाकिम, गुफ्तार में किरदार में हैदर की तरह हैं। इस प्रोग्राम में सय्यद नूर मियां ने खुद अपना कलाम पढ़ा-लुटा के किसने बता घर का घर नमाज पढ़ी, किसी ने और भी कटवा के सर नमाज पढ़ी, फरिश्ते उसको मोसल्ला बनाते हैं ऐ नूर, मेरे हुसैन ने जिस रेत पर नमाज पढ़ी। नूर मियां के पढ़ने के बाद सलातो सलाम पढ़ा गया। सलातो सलाम के बाद खत्म हुआ। फिर इसके बाद हाफिज अब्दुर्रहमान साहब ने एलान किया कि जिन-जिन लोगों को नूर मियां से मुरीद होना है वे लोग अभी मुरीद हो जाएं। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा क्षेत्र के काफी लोग नूर मियां से मुरीद हुए। आए सभी मेहमानों के लिए खानकाह नूरिया की तरफ लंगर का भी इंतजाम किया गया था। पूरे प्रोग्राम की देखभाल एवं मैनेजमेंट की जिम्मेदारी नूर मियां के छोटे भाई सय्यद मुहम्मद मुजीबुल हसन निभाते रहे।
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