कमलनाथ ने सरकार से की मध्यप्रदेश लैंड पूलिंग एक्ट वापस लेने की मांग, कहा- ‘हर स्तर पर करेंगे पुरजोर विरोध’

Aug 12, 2025 - 17:03
Aug 12, 2025 - 17:03
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कमलनाथ ने सरकार से की मध्यप्रदेश लैंड पूलिंग एक्ट वापस लेने की मांग, कहा- ‘हर स्तर पर करेंगे पुरजोर विरोध’

भोपाल (आरएनआई) कमलनाथ ने प्रदेश सरकार से विरोधी लैंड पूलिंग एक्ट वापस लेने की मांग की है। उन्होंने इसे ‘भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीति’ करार देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश के इस नए भूमि अधिग्रहण कानून से किसानों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि अधिग्रहण किसानों के ऊपर एक और हमला है और इस नीति से प्रदेश के किसानों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पंजाब सरकार को भी इसी तरह की नीति वापस लेनी पड़ी है और अगर एमपी सरकार ने इसे वापस नहीं लिया तो कांग्रेस उनके खिलाफ हरसंभव कदम उठाएगी।

क्या है लैंड पूलिंग एक्ट
मध्यप्रदेश विधानसभा में पारित नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) अधिनियम-2025 नगरीय निकायों, उद्योगों और शासकीय परियोजनाओं के लिए लैंड पूलिंग स्कीम को लागू करता है। इस अधिनियम के तहत सरकार बिना नगद मुआवजा दिए किसानों की जमीन अधिग्रहण करेगी और बदले में अधिग्रहीत जमीन का 50% हिस्सा विकसित रूप में भू-स्वामियों को लौटाएगी। यह नीति गुजरात मॉडल से प्रेरित है और सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य परियोजनाओं में देरी को कम करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इस नए अधिनियम के तहत सरकार 40 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र या 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण कर सकती है। पारंपरिक नगद मुआवजे के बजाय, भू-स्वामियों को उनकी जमीन का आधा हिस्सा विकसित रूप में वापस मिलेगा, जिसमें सड़क, बिजली, और नाली जैसी बुनियादी सुविधाएँ शामिल होंगी।

कमलनाथ ने सरकार से की एक्ट वापस लेने की मांग 
सरकार भले ही इस अधिनियम के लाभ गिना रही हो लेकिन कई जगह किसानों ने इसका विरोध किया है। वहीं, कांग्रेस ने भी इसे किसान विरोधी बताते हुए सरकार से ये अधिनियम वापस लेने की मांग की है। इसपर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि पंजाब सरकार को सोमवार को किसानों के विरोध के कारण अपनी इसी तरह की लैंड पूलिंग नीति वापस लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ‘मध्यप्रदेश में भाजपा पहले से किसान विरोध के काम कर रही है। चुनावी वादे के मुताबिक़ किसानों को गेहूं और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दिया जा रहा है। किसानों की आय दुगुनी करने के वादे से भी भाजपा मुकर चुकी है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण चयनित किसानों के ऊपर एक और हमला है।’ कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदेश सरकार समय रहते यह नीति वापस नहीं लेती तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को मनवाने के लिए हरसंभव रास्ता अख्तियार करेगी।

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