एसआईआर पर बढ़ी राजनीतिक तकरार: पीएम के ‘ड्रामा नहीं, डिलीवरी’ तंज पर अखिलेश यादव का पलटवार—पूछा, क्या BLO की मौतें भी ड्रामा हैं?
नई दिल्ली (आरएनआई) संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही एसआईआर (Special Summary Revision) को लेकर सियासत गरम हो गई है। सोमवार को सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष पर किए गए तंज—“यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए”—पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव ने तीखा जवाब दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को ईमानदारी और गंभीरता के साथ लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या बीएलओ की मौतें भी ड्रामा हैं?” उन्होंने दावा किया कि कई बीएलओ अपने ऊपर बढ़ते दबाव और तनाव के कारण गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब नागरिकों के वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर का इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम काटने के लिए किया जा रहा है, न कि सुधार के लिए। “अगर वोट ही कट जाएगा, तो लोग अपना भविष्य कैसे गढ़ेंगे?”—अखिलेश ने सवाल उठाया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने नोएडा की बड़ी आईटी कंपनियों को हायर किया है और उनके जरिए यूपी की वोटर लिस्ट की जानकारी जुटाई जा रही है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया एसआईआर के नाम पर एकतरफा बदलाव करने और विपक्षी वोट काटने की कोशिश है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि जब यूपी में कोई तत्काल चुनाव नहीं है, तो फिर इतनी जल्दबाजी क्यों? उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में तैनात कई बीएलओ फॉर्म भरने में भी सक्षम नहीं हैं और भारी कार्यभार के कारण तनाव में हैं।
शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही यह साफ है कि एसआईआर का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और सड़कों दोनों पर राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है।
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