एनसीईआरटी के नए मॉड्यूल पर कांग्रेस का हमला: कहा- भारत-पाक विभाजन की समझ नहीं भाजपा को
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर विशेष मॉड्यूल जारी किया है। इस मॉड्यूल में विभाजन के लिए मुहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसकी कांग्रेस ने आलोचना की है।
नई दिल्ली (आरएनआई) भारत-पाकिस्तान बंटवारे को लेकर जारी एनसीईआरटी के नए मॉड्यूल पर कांग्रेस ने हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि एनसीईआरटी को भारत-पाकिस्तान विभाजन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। कांग्रेस ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में आरएसएस का जिक्र करने पर पीएम मोदी को भी घेरा।
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि मैं एनसीईआरटी को विभाजन पर चर्चा के लिए चुनौती देता हूं। भाजपा के पास एनसीईआरटी है। वे विभाजन के बारे में कुछ नहीं जानते। प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण और उसमें आरएसएस के जिक्र पर कांग्रेस नेता ने कहा कि यह बहुत निराशाजनक था। ऐसा लग रहा था जैसे यह उनका विदाई भाषण हो। ऐसा लग रहा था कि वह किसी को खुश करने के लिए ऐसा कह रहे हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर विशेष मॉड्यूल जारी किया है। इस मॉड्यूल में विभाजन के लिए मुहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया गया है। इस मॉड्यूल को ‘विभाजन के अपराधी’ (Culprits of Partition) शीर्षक दिया गया है और इसे कक्षा 6 से 8 और कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए अलग-अलग रूप में तैयार किया गया है। हालांकि, यह किसी भी कक्षा की पाठ्यपुस्तक का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पूरक शैक्षिक सामग्री के तौर पर पेश किया गया है, जिसे पोस्टर, वाद-विवाद, प्रोजेक्ट्स और चर्चाओं के माध्यम से बच्चों को सिखाया जाएगा।
एनसीईआरटी द्वारा जारी मॉड्यूल में भारत-पाक विभाजन के लिए तीन प्रमुख शख्सियतों को जिम्मेदार ठहराया गया है- मुहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन। मॉड्यूल के मुताबिक, जिन्ना ने विभाजन की मांग की, कांग्रेस ने इसे स्वीकार किया और माउंटबेटन ने इसे लागू किया। इसके साथ ही इसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू का जुलाई 1947 में दिया गया एक एतिहासिक भाषण भी शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था- "विभाजन बुरा है, लेकिन एकता की कीमत चाहे जो भी हो, गृहयुद्ध की कीमत उससे कहीं ज्यादा होगी।" यह उद्धरण उस समय की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जब देश कठिन फैसलों के मोड़ पर खड़ा था।
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