‘इंडिगो की विफलता सरकार के एकाधिकार मॉडल की कीमत’ — राहुल गांधी का केंद्र पर हमला
नई दिल्ली (आरएनआई) — देश में हाल के दिनों में IndiGo की उड़ानों में आए व्यवधानों के बीच, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा व्यंग्य किया है। उन्होंने कहा कि इंडिगो में उत्पन्न परिचालन संकट इसी सरकार के ‘एकाधिकार मॉडल’ की कीमत है और इस कीमत का बोझ आम भारतीयों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को हर क्षेत्र में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा मिलनी चाहिए — न कि “मैच-फिक्सिंग” पर आधारित एकाधिकार।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इंडिगो की विफलता का असर देश के यात्रियों पर पड़ रहा है — देरी, उड़ानों के रद्द होने और असहाय महसूस करने के रूप में। उन्होंने कहा कि आम नागरिक की परेशानी ही इस एकाधिकार नीति का असली मोल है।
वर्तमान में इंडिगो ने पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों उड़ानें रद्द की हैं और कंपनी ने मान लिया है कि हालात सुधारने के लिए उन्हें देश के नागरिक उड्डयन नियामक DGCA को एक वक्त-सीमा दी है। बयान में कहा गया है कि सरकार द्वारा लागू फ़्लाइट-ड्यूटी-टाइम-लिमिटेशन (FDTL) नियमों के दूसरे चरण को लेकर गलत योजना और आंकलन इस समस्या की बड़ी वजह है।
विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने इस विमानन संकट की गंभीरता को देखते हुए उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। उन्होंने इंडिगो से कहा है कि कंपनी को अपने परिचालन में सुधार करने और नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी पूरी करनी होगी।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी की आलोचना और इंडिगो परिचालन संकट — दोनों ही इस बात की ओर संकेत करते हैं कि भारत में विमानन क्षेत्र में एक-पक्षीयता और नियामक चुनौतियाँ उस सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रही हैं, जिनका सीधा असर आम यात्रियों की सुविधा और भरोसे पर पड़ रहा है।
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