आज़ाद हिंद फौज की अमर गाथा: विदेश में हुआ जन्म, 85 हजार सैनिकों की शौर्यगाथा से थर्रा उठा था ब्रिटिश साम्राज्य
नई दिल्ली (आरएनआई) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में आज़ाद हिंद फौज (INA) का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। विदेश की धरती पर जन्मी इस सेना ने अंग्रेजी साम्राज्य को उसकी जड़ों तक हिला दिया था। करीब 85 हजार से अधिक भारतीय सैनिकों की वीरता, अनुशासन और देशभक्ति ने स्वतंत्रता की लड़ाई को नया मोड़ दिया।
आज़ाद हिंद फौज की स्थापना नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने 1942 में दक्षिण-पूर्व एशिया में की थी। ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ जैसी ऐतिहासिक पुकार ने उस दौर के हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की ज्वाला जला दी। यह सेना उन भारतीय सैनिकों से बनी थी जो ब्रिटिश सेना में थे, पर जब मौका मिला तो उन्होंने मातृभूमि की आज़ादी के लिए बंदूकें अंग्रेजों की जगह अपने देश की सेवा में तान दीं।
सिंगापुर, बर्मा (म्यांमार) और मलाया के मोर्चों पर आज़ाद हिंद फौज ने अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ा। उनकी इस ललकार से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठी थी। बोस के नेतृत्व में यह आंदोलन सिर्फ सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारतीय आत्मसम्मान और स्वराज्य की पुकार बन गया था।
दिल्ली के लाल किले में आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों पर चले मुकदमों ने पूरे देश में जनआंदोलन की लहर पैदा कर दी थी। भारत के हर कोने में आज़ाद हिंद फौज के नाम पर लोगों ने आज़ादी की कसम खाई।
आज भी नेताजी की वह गर्जना— "जय हिंद"— हर भारतीय के दिल में गूंजती है। आज़ाद हिंद फौज का यह अद्भुत अध्याय हमें याद दिलाता है कि आज़ादी सिर्फ एक दिन की कहानी नहीं, बल्कि लाखों त्यागों, बलिदानों और अडिग संकल्प का परिणाम है।
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