आखिरी सांसें गिन रहा नक्सलवाद! सरकार की रणनीति से घुटनों पर आया वामपंथी उग्रवाद
नई दिल्ली (आरएनआई)। देश में दशकों तक आतंकी साया बने रहे नक्सलवाद का अब लगभग सफाया होने जा रहा है। केंद्र सरकार की बहुस्तरीय रणनीति — सुरक्षा, विकास और पुनर्वास के समन्वित मॉडल — ने वामपंथी उग्रवाद को घुटनों पर ला दिया है।
गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक दशक में नक्सली हिंसा में 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर अब केवल 18 रह गई है। आम नागरिकों की मौतों में 70 प्रतिशत गिरावट आई है।
अक्तूबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, 1,225 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 270 उग्रवादी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब अधिकांश नक्सली गुट कमजोर पड़ चुके हैं और संगठनात्मक स्तर पर बिखराव की स्थिति में हैं।
सरकार ने मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, संचार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आधारभूत सुविधाओं को तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
साल 2004 से 2014 के बीच देश में नक्सली हिंसा की 16,463 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 1,851 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। जबकि 2014 से 2024 के बीच यह आंकड़ा घटकर 7,744 घटनाओं और 509 शहीदों तक सिमट गया।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि अब फोकस शेष 18 जिलों पर है, जहां सटीक इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस की भागीदारी से अंतिम सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
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