अफसरों के आगमन पर शीशे की तरह चमकता स्टेशन, उपेक्षा के चलते गोशाला बन गया मुंगावली स्टेशन
मुंगावली(अशोकनगर) (आरएनआई) मुंगावली स्टेशन हर माह टिकिटो को विक्रय कर लाखो रुपये लेता है परंतु मुंगावली स्टेशन पर सुविधाओ को लेकर कुछ भी नही हैं। संबंधित अधिकारी केवल गुमराह करते है, आगे कर दिया जायेगा, हो जायेगा ये उनका कार्य है, मे बात करता हू, आदि कह कर, यात्रियो के दर्द और परेशानी को छुपा देता है।
परंतु उन्हे यात्रियो की सुविधाओ के लिए ध्यान नही देता आखिर कब तक यात्री परेशान होता रहेगा। सारी गर्मी निकल गई,परंतु मुंगावली स्टेशन पर यात्रियो को प्लेटफार्म 2 पर भरपूर पानी नही मिल सका। पानी कहां से मिलेगा नल स्टेंडो मे नल ही नही लग सके, संबंधित अधिकारी पूरी गर्मी आश्वस्त करते रहे। नल लग गये, पानी आ रहा है परंतु पानी को लेकर जब शिकायत की तो रात को मिस्त्री से सही करवा कर एक नल स्टेंड का पानी आते फोटो डाल दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियो को भृमित करने, संबंधित अधिकारी कहते रहे नल चोरी कर ले गये आदि परंतु कुछ भी हो वरिष्ठ अधिकारियो के आगमन पर सभी सुविधाए लागू हो जाती है। न चोर चोरी कर पाता है और न ही संबंधित अधिकारी जाते है। स्थिति जस की तस हो जाती, जो भी हो सुविधाओ केवल यात्रियो अधिकारियो के लिए उपभोक्ताओ को तो वही अंग्रेजो के जमाने की सुविधाए आज आधुनिक भारत मे मिल पा रही है। जबकि ये आधुनिक भारत मोदी जी के समय का है जिसमे भारत के अधिकतर स्टेशनो का करोडो रुपये का खर्च कर यात्रियो को आधुनिक सुविधाओ का पहली बार भारत के किसी मुखिया ने मन बनाया। परंतु इन सब का डर भय दूर करके संबंधित अधिकारी अपनी जैब भर रहे है यात्रियो की परेशानी से इनका कोई सरोकार नही। हां जब इनके वरिष्ठ आका भृमण करने आते है तो ये सभी सुविधाए प्रारंभ हो जाती है जिन्हे उपभोक्ता वर्षो शिकायत करता रहता है। वह तो नही हो पाती वरिष्ठ अधिकारियो के आने पर सब चार चौकस हो जाता है, एसा देखने पर सोचने मे आता है कि जो भारत सरकार रेल यात्रियो को उपभोक्ताओ को सुविधाये देना चाह रही है। वह सुविधाए वास्तविक उपभोक्ताओ को नही बल्कि वरिष्ठ रेल अधिकारियो के लिए है क्यो कि उनके आने पर ही यह सुविधाए स्टेशनो पर मिल पाती है उनके जाने के बाद जस की तस परेशानिया।
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