UAE से भारत लाया गया वांछित मुस्तफा, विदेश से संचालित कर रहा था महाराष्ट्र में नशीली दवाओं की फैक्टरी
सांगली मेफेड्रोन निर्माण मामले का आरोपी कुब्बावाला मुस्तफा अबूधाबी से भारत लाया गया। सीबीआई ने एनसीबी-अबू धाबी के जरिये उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी करवाया था। उस पर विदेश में रहकर भारत में नशीली दवाओं की फैक्टरी चलाने का आरोप है।
नई दिल्ली (आरएनआई) सीबीआई विदेश में रहकर महाराष्ट्र में नशीली दवाओं की फैक्टरी चलाने के वांछित आरोपी को अबूधाबी से वापस लेकर आई है। आरोपी कुब्बावाला मुस्तफा यूएई और दुबई में रहकर भारत में नशे का कारोबार कर रहा था। सीबीआई ने बताया कि नशीली दवाएं बनाने के आरोपी वांछित कुब्बावाला मुस्तफा को मुंबई पुलिस की चार सदस्यीय टीम के साथ संयुक्त अरब अमीरात से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया।
सीबीआई की अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग इकाई (आईपीसीयू) एनसीबी-अबू धाबी के सहयोग से वांछित रेड नोटिस प्राप्त कुब्बावाला मुस्तफा को सफलतापूर्वक भारत वापस लाई। सांगली में एक सिंथेटिक ड्रग निर्माण फैक्टरी चलाने के आरोप में मुंबई पुलिस को उसकी तलाश थी।
सांगली में कुब्बावाला मुस्तफा की फैक्टरी से 252 करोड़ रुपये मूल्य की कुल 126.141 किलोग्राम मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद और जब्त की गई थी। उसके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। अदालत ने उसके खिलाफ ओपन डेटेड गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि सीबीआई ने इंटरपोल के माध्यम से एनसीबी-अबू धाबी के साथ मिलकर की गई गहन जांच के बाद मुस्तफा की भौगोलिक स्थिति संयुक्त अरब अमीरात में पाई थी। मुंबई पुलिस के अनुरोध पर सीबीआई ने 25 नवंबर, 2024 को इंटरपोल के माध्यम से रेड नोटिस प्रकाशित करवाया।
एनसीबी-अबू धाबी ने सीबीआई को 19 जून 2025 को बताया कि उनके अधिकारियों ने इस व्यक्ति को भारत वापस लाने के लिए यूएई में एक सुरक्षा मिशन भेजने का अनुरोध किया है। इसके बाद यूएई से आरोपी को वापस लाने के लिए मुंबई पुलिस की एक टीम का गठन किया गया। इससे पहले सीबीआई ने सांगली मेफेड्रोन निर्माण मामले के आरोपी ताहिर सलीम डोला का यूएई से प्रत्यर्पण कराया था।
मेफेड्रोन ड्रग को कोड नाम के तहत 'म्याऊं-म्याऊं' कहा जाता है। मेफेड्रोन कोई दवा नहीं, बल्कि पौधों के लिए बनी सिथेंटिक खाद है, लेकिन इसका सेवन करने से हेरोइन और कोकीन से भी ज्यादा नशा होता है। नशे के कारोबारी इसकी खपत के लिए कॉलेजी छात्र-छात्राओं तथा पार्टी में जाने वाले युवाओं को निशाना बनाते हैं। 'म्याऊं-म्याऊं' के सौदागर फेसबुक प्रोफाइल पर ऐसे युवाओं को तलाशते हैं, जो पार्टी या क्लब में जाना पसंद करते हैं। यह ड्रग बहुत ही सस्ता है।
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