BBD ग्रुप का ‘शिक्षा सम्राज्य’ बना घोटालों की परतों से — दलित के नाम ज़मीन, फर्जी दस्तावेज़ और एक रहस्यमयी मौत!
लखनऊ (आरएनआई) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लखनऊ दौरे से पहले शहर में एक बड़े घोटाले को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। समाजसेवी संगठनों के अनुसार, BBD ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता और उनके पुत्र विराज सागर दास पर धर्म और शिक्षा की आड़ में आर्थिक अपराध, फर्जीवाड़े, और दलित शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं।
दलित के नाम अरबों की संपत्ति और मौत का रहस्य
मामला राजकुमार राम नामक एक दलित, अपंग और अशिक्षित व्यक्ति से जुड़ा है, जिनका इस्तेमाल इंडियन मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े हजारों करोड़ के घोटाले में किया गया। आरोप है कि CBI जांच से बचने के लिए उन्हें एक दिन के भीतर बैंक का चेयरपर्सन बनवाया गया।
फर्जी बैलेंस शीट तैयार की गईं, अंगूठे के निशानों से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कराए गए, और राजकुमार राम के नाम पर गोमती नगर, सेमरा, शाहपुर और उत्तर धोना जैसी प्रमुख जगहों पर बेनामी जमीनें खरीदी गईं — जिनकी कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
राजकुमार राम की रहस्यमयी मौत
मई 2016 में राजकुमार की मौत लखनऊ के एक ट्रॉमा सेंटर में हुई, जहां उन्हें IMC बैंक घोटाले का आरोपी बनाकर छोड़ दिया गया था। आरोप है कि मौत के बाद उनकी सभी उंगलियों के फिंगरप्रिंट लिए गए और फिर 2017 में फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे ज़मीनें ट्रांसफर कर दी गईं।
कानून का खुला उल्लंघन
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम, 1950 की धारा 157-A और बेनामी संपत्ति अधिनियम, 1988 एवं संशोधन 2016 का सीधा उल्लंघन है। जमीनें बाद में दो निजी कंपनियों — Hightech Protection India Pvt Ltd और Lord Ganesha Hospitalities Pvt Ltd — को बेच दी गईं।
‘शिक्षा की आड़ में शोषण’?
शिकायतकर्ता ने दस्तावेज़ RBI, CBI और राज्य प्रशासन को सौंपे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि इस पूरे मामले को दबाने की कोशिशें हो रही हैं, जबकि समाजसेवी संस्थाएं न्याय की मांग कर रही हैं।
अब सवाल उठते हैं:
क्या एक शिक्षण संस्थान अपराधों की ढाल बन सकता है?
क्या एक दलित, अपंग और गरीब व्यक्ति को बलि का बकरा बनाकर शिक्षा सम्राज्य खड़ा करना न्याय है?
क्या सरकारें और एजेंसियां राजनीतिक दबाव में आंखें मूंद सकती हैं?
अब निगाहें राजनाथ सिंह के दौरे पर
अब जबकि रक्षामंत्री लखनऊ में मौजूद रहेंगे, क्या वे इस गंभीर मामले की ओर ध्यान देंगे? या फिर यह मामला भी न्याय, संवेदनशीलता और संविधान की आंखों में काजल बनकर दबा दिया जाएगा?
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