54 साल बाद खुला बांकेबिहारी मंदिर का तोशखाना, मिला चांदी का छत्र और पुराने संदूक, मंदिर की मर्यादा हुई तार-तार
मथुरा/वृंदावन (आरएनआई)। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी मंदिर के 54 साल से बंद पड़े तोशखाने (खजाना कक्ष) को धनतेरस के अवसर पर हाई पावर्ड प्रबंधन कमेटी के आदेश पर शनिवार को खोला गया। टीम के प्रवेश के दौरान कई बाधाएं आईं, लेकिन अंततः खजाने से ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की वस्तुएं निकलनी शुरू हुईं।
खजाने से अब तक मिले प्रमुख सामान
एक लकड़ी का बड़ा संदूक
गहने रखने वाले दो छोटे बक्से
2 फरवरी 1970 का एक पत्र
चांदी का छोटा छत्र
तीन देग, तीन बड़े कलश
एक परात
चार गोलाकार बड़े पत्थर
एक बड़ा लकड़ी का तख्त
टूटे हुए कुंडे
टीम को सांप ने डराया, वन विभाग ने रेस्क्यू किया
तहखाना दशकों से बंद होने के कारण अंदर धूल, गैस और सीलन भर गई थी। जैसे ही फावड़ा चलाकर मिट्टी हटाई गई, एक काला सांप दिखाई दिया। टीम तुरंत बाहर निकली और वन विभाग को सूचना दी गई। वनकर्मियों ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद ही कार्य दोबारा शुरू हो सका।
गोस्वामी समाज ने किया विरोध
तहखाना खोले जाने पर गोस्वामियों ने आपत्ति जताई और मांग की कि पूरी प्रक्रिया मंदिर परिसर में स्क्रीन लगाकर लाइव कराई जाए। इसके बावजूद प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रखी।
इतिहास और पृष्ठभूमि
अंतिम बार तोशखाना वर्ष 1971 में तत्कालीन कमेटी अध्यक्ष प्यारेलाल गोयल की देखरेख में खोला गया था।
उस समय कुछ सामान की सूची बनाकर सीलबंद बक्से स्टेट बैंक, भूतेश्वर शाखा, मथुरा में जमा कराए गए थे।
कहा जाता है कि मंदिर निर्माण के समय पूजनोपरांत सोना, चांदी, पन्ना निर्मित हार, रियासतों द्वारा दानपत्र, सिक्के और आभूषण यहां रखे गए थे।
चोरी की घटनाएं और सीलबंद खजाना
ब्रिटिश काल में 1926 और 1936 में दो बार चोरी हो चुकी है, जिसके बाद मुख्य द्वार बंद कर दिया गया और एक छोटा मोखा बनाया गया।
1971 में अदालत के आदेश पर दरवाजे पर सील लगा दी गई थी। 2002 और 2004 में इसे खोलने के प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली।
तहखाने का स्थान
श्रीबिहारीजी के दाहिनी ओर का द्वार खोलकर करीब दर्जन सीढ़ियां उतरने के बाद बाईं दिशा में सिंहासन के मध्य तोशखाना स्थित है।
Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0



