"सबका साथ-सबका विकास" की खुलती तस्वीर: झोपड़ी में तड़पता असहाय वृद्ध, सरकार की योजनाओं से वंचित
बजरंगगढ़/गुना (आरएनआई) एक ओर सरकार "सबका साथ, सबका विकास" का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर बजरंगगढ़ ग्राम पंचायत में मानवता को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया है। नगर प्रवेश मार्ग पर स्थित वीएसएनएल टावर के पास वर्षों से एक असहाय वृद्ध "ओम", जिनकी उम्र लगभग 70 वर्ष बताई जा रही है, नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
चलने-फिरने में अक्षम, अस्वस्थ ओमजी झोपड़ी में अकेले ही पड़े रहते हैं, न तो ठीक से बोल पाते हैं, न ही किसी से सहायता मांग सकते हैं। बरसात के इस दौर में टपकती झोपड़ी उनकी पीड़ा को और बढ़ा देती है। जलभराव के कारण फर्श तक भीग जाता है, और रातें घनघोर अंधेरे में बीतती हैं — क्योंकि बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है।
झोपड़ी के चारों ओर उगी खरपतवार से जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी मंडरा रहा है। वहीं भोजन जागरूक नागरिकों की मदद से प्राप्त होता है यह दृश्य केवल एक वृद्ध की दयनीय हालत नहीं दर्शाता, बल्कि यह सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय ग्रामवासियों का कहना है कि ओमजी को आज तक किसी भी सरकारी योजना — चाहे वह वृद्धावस्था पेंशन हो, पीएम आवास योजना या राशन सुविधा — का लाभ नहीं मिला है। वे प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार हैं।
इस अमानवीय स्थिति को देख अधिवक्ता गौरव भट्ट ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक मार्मिक अपील की है। उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र सिकरवार एवं जिला प्रशासन गुना से आग्रह किया है कि वे तुरंत हस्तक्षेप कर ओमजी को रहने योग्य आवास, इलाज, राशन एवं आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का "सबका साथ सबका विकास" का नारा तभी सफल हो सकेगा जब समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा
क्या सरकार जागेगी?
अब यह देखना होगा कि क्या संबंधित जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस अपील को गंभीरता से लेकर ज़रूरतमंद तक मदद पहुँचाएँगे या ओमजी जैसे असंख्य बेसहारा लोग यूँ ही सिस्टम की अनदेखी का शिकार होते रहेंगे।
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