मप्र में बढ़ते बाल विवाह मामले सरकार की नाकामी: विधानसभा में जयवर्धन सिंह के सवालों से उजागर हुई चिंताजनक तस्वीर

Tuesday, December 2, 2025 - 21:16
Updated: 9 months ago
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मप्र में बढ़ते बाल विवाह मामले सरकार की नाकामी: विधानसभा में जयवर्धन सिंह के सवालों से उजागर हुई चिंताजनक तस्वीर

भोपाल (आरएनआई) मध्यप्रदेश में नाबालिग बच्चियों के बाल विवाह को लेकर पूर्व मंत्री एवं राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्न के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे प्रदेश में बाल संरक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सिंह ने बताया कि सरकार के जवाब के अनुसार साल 2020 से 2025 तक बाल विवाह के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश में बाल विवाह पूरी तरह प्रतिबंधित है।

जयवर्धन सिंह ने सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आश्चर्य की बात है कि करोड़ों रुपये खर्च करने, योजनाएँ चलाने और अभियानों के दावे करने के बावजूद प्रदेश में बाल विवाह पर रोक का कोई ठोस असर दिखाई नहीं दे रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार जवाब में बताती है कि—
• प्रदेशभर में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त हैं।
• "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के तहत हर माह योजनाबद्ध गतिविधियाँ आयोजित होती हैं।
• अक्षय तृतीया व देव उठनी एकादशी पर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
• नुक्कड़ नाटक, बाल चौपाल, कार्यशाला, रैलियाँ आयोजित की जाती हैं।
• जिला व ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें, सूचना दल, उइन दस्ता, कंट्रोल रूम और नियंत्रण कक्ष गठित किए जाते हैं।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि इन सभी प्रयासों के बावजूद अगर बाल विवाह में बढ़ोतरी के आंकड़े सामने आ रहे हैं, तो यह इस सरकार की नाकामी और योजनाओं की विफलता को उजागर करता है। सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार केवल कागज़ों पर योजनाएँ चलाकर वास्तविक जमीनी कार्रवाई नहीं करेगी, तो नाबालिग बेटियों का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकेगा।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट – 2006 (PCMA-2006) के अनुसार—
• लड़की की न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
• लड़के की न्यूनतम आयु: 21 वर्ष
इनसे कम आयु में किया गया विवाह बाल विवाह है, जो कानूनन गंभीर अपराध है।
देश में बाल विवाह संज्ञेय (Cognizable) अपराध है, जिसमें—
• बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, रिश्तेदार, पंचायत, पुरोहित या कोई भी व्यक्ति दोषी माना जाता है।
• दंड: 2 वर्ष तक की सजा, या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि जब इतने कड़े कानून और प्रावधान मौजूद हैं, तब भी बाल विवाह के मामलों का बढ़ना सरकार की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि सरकार कागज़ी कार्यवाही से बाहर निकलकर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे और नाबालिग बेटियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए।

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