नए आईने में पुरानी सूरत: विद्यालय में शिक्षिका की कथनी-करनी पर सवाल
सुमन पांडेय
शाहजहांपुर (आरएनआई) शाहजहांपुर के एक विख्यात विद्यालय में कक्षा 7 की कक्षा के दौरान घटी एक घटना ने सामाजिक समानता के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कक्षा में पठन-पाठन के बीच शिक्षिका ने बच्चों को नैतिक शिक्षा देते हुए कहा, “हम सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं, न कोई उच्च है न निम्न, और हमें शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि हम अच्छे नागरिक बन सकें।”
इसी दौरान अचानक उन्हें खांसी आ गई। एक छात्रा तुरंत पानी लाने दौड़ी और गिलास पकड़ाकर शिक्षिका को देने लगी। बातचीत के दौरान जब शिक्षिका ने छात्रा से नाम पूछा और उसने अपना नाम "सिंधु जाटव" बताया, तो शिक्षिका ने पानी का गिलास अलग रखते हुए छात्रा को बैठ जाने को कहा।
इस घटना के बाद विद्यालय प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या समानता की बातें सिर्फ़ भाषणों तक सीमित हैं? सामाजिक संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि शिक्षा के मंदिर में जातिगत भेदभाव का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
प्रबंधन का कहना है कि वे मामले की जांच करेंगे और यदि भेदभाव साबित हुआ तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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