ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा की फीस बढ़ाई 88 लाख रुपये, भारत के लोगों पर पड़ेगा बड़ा असर
वॉशिंगटन (आरएनआई) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा की आवेदन फीस बढ़ाकर सालाना 1 लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने गोल्ड कार्ड वीज़ा प्रोग्राम की फीस भी बढ़ा दी है, जो अब व्यक्तियों के लिए 10 लाख डॉलर और कंपनियों के लिए 20 लाख डॉलर हो गई है।
एच-1बी वीज़ा 1990 में शुरू हुआ था और यह कुशल कर्मचारियों के लिए है। सबसे अधिक यह वीज़ा भारतीयों को मिलता है, इसके बाद चीन के नागरिक इसका लाभ उठाते हैं। ट्रंप प्रशासन ने यह कदम नई आप्रवासन नीति के तहत उठाया है। राष्ट्रपति लगातार यह कहते रहे हैं कि विदेशी कर्मचारियों की वजह से अमेरिकी नौकरियां प्रभावित हो रही हैं।
व्हाइट हाउस स्टाफ़ सेक्रेट्री विल शार्फ़ ने कहा कि अब कंपनियों को केवल ऐसे बेहद कुशल कर्मचारियों को ही एच-1बी पर अमेरिका लाना पड़ेगा जिनके लिए कोई स्थानीय विकल्प नहीं है।
पिछले साल तक एच-1बी वीज़ा की प्रशासनिक फीस केवल $1,500 थी। ट्रंप के आदेश के बाद अब अमेरिका में अगले वित्त वर्ष के लिए वीज़ा संख्या घटकर 3,59,000 रह गई है, जो पिछले चार साल में सबसे कम है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। ई-मार्केट विशेषज्ञ जेरेमी गोल्डमैन के अनुसार, “शुरुआत में अमेरिका को अधिक कमाई हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इनोवेशन पर असर पड़ेगा।”
एच-1बी वीज़ा पाने वाले कर्मचारियों में 71% भारतीय, इसके बाद 11.7% चीनी नागरिक शामिल हैं। इसके चलते भारत के कुशल पेशेवरों के लिए अमेरिका जाना अब और महंगा और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों जैसे अमेज़न, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने इस वीज़ा का सबसे अधिक उपयोग किया है।
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