टीआई दिलीप राजौरिया पर मारपीट की शह देने का आरोप, ग्रामीणों ने निलंबन की मांग की
गुना (आरएनआई) जिले के बमौरी थाना क्षेत्र के ग्राम सोनखरा में शासकीय भूमि को लेकर हुए विवाद में बमौरी थाना प्रभारी दिलीप राजौरिया पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक पक्ष के ग्रामीणों का कहना है कि सारा विवाद टीआई की शह पर हुआ। उधर भ्रष्टाचार की शिकायत में दोषी पाए जाने के बाद भी निरीक्षक दिलीप राजौरिया को थाना इंचार्ज बनाए रखने को लेकर भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्राम सोनखरा के ग्रामीण गिर्राज, गोविंद, हरिओम आदि की ओर से एसपी को की गई शिकायत के अनुसार 19 दिसम्बर 2025 को बमौरी टीआई दिलीप राजौरिया फोर्स के साथ विवाद के पहले से ग्राम सोनखरा में मौजूद थे और सरपंच सूरज धाकड़ के घर दारू और मुर्गा की पार्टी कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने खलिहान पर बुलाया जहां एक पक्ष के ग्रामीण सालों से फसल रखते आ रहे हैं। वहां टीआई ने नशे की हालत में गालीयां दी और मारपीट कर हमें केस में फसाने की धमकी दी। आरोप है कि इसके बाद मवेशियों के लिए रखे चारे में ग्राम रोजगार सहायक कैलाश धाकड़ को बोलकर आग लगवाई और तत्काल जमीन तत्काल खाली करने का कहा। शिकायत के अनुसार टीआई के सामने ही आरोपियों ने नारायण धाकड़ से मारपीट चालू कर दी, जिसके कारण विवाद बढ़ गया। इसी बीच टीआई साहब हमको ही गाड़ी में बैठाकर थाने ले गये और सरपंच सूरज धाकड़ से कहा कि तुझे जो करना है करले मैं सब सम्भाल लूंगा। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक उन्होंने दिलीप राजौरिया से जब राजस्व अधिकारियों को बुलाने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद सरपंच के 15 - 20 गुंडे 3 गाड़ीयों में भरकर आए और उन्होंने घरों में घुसकर महिलाओं एवं बच्चों के साथ अभद्रता और मारपीट कर घरों में तोड़फोड़ एवं लूटपाट की। ग्रामीणों के मुताबिक जब थाने में उन्हें इस घटना की सूचना मिली तो उन्होंने टीआई राजौरिया से कहा कि आप पुलिस बल लेकर सोनखरा चलो और हमारे परिवारों की रक्षा करो तो उन्होंने उल्टा हमें ही गालियां दीं। जब मालूम पड़ा कि गांव में लोगों की बहुत ज्यादा मारपीट हुई है और शंकरलाल गंभीर रूप से सिर में चोट लगने के कारण घायल और अचेत हो गए हैं तब टीआई ने घबराकर हम लोगों को थाने से छोड़ा। इसके बाद हम लोग थाने से सीधे गुना हॉस्पिटल के लिए रवाना हुए। ग्रामीणों ने टीआई दिलीप राजौरिया को निलंबित कर उनके विरुद्ध अपराध दर्ज करने की मांग की है।
पहले भी लगे कई आरोप, जांच में दोषी पाए गए पर नहीं हुई कोई कार्यवाही
निरीक्षक दिलीप राजौरिया पर पूर्व में भी गंभीर आरोप लगे हैं। केंट थाना प्रभारी रहने के दौरान दिलीप राजौरिया समेत कुछ पुलिसकर्मियों के विरुद्ध पीड़ित मनविंदर सिंह बल ने भ्रष्टाचार समेत झूठा मुकदमा बनाने की शिकायत की थी। ये शिकायत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई जांच में थाने के वीडियो फुटेज के आधार पर सही पाई गई। लेकिन इसके बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि पीएचक्यू के स्पष्ट निर्देश हैं कि भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर अधिकारी को थाने की कमान न सौंपी जाए। इस मामले के अलावा सौरभ चंदेल नामक युवक पर चार घंटे में दो अपराध दर्ज करने के मामले की शिकायत होने पर थाना केंट के सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए जाने के आरोप भी लगे थे जो तकनीकी जांच में सही पाए गए थे। लेकिन किसी भी मामले में कार्यवाही न होने से जिले के आला अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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