जिला चिकित्सालय गुना में क्लबफुट जागरूकता कार्यक्रम एवं क्लीनिक का आयोजन, 13 बच्चों को मिला लाभ
गुना (आरएनआई) राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और अनुष्का फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में डीईआईसी, जिला चिकित्सालय गुना में क्लबफुट जागरूकता कार्यक्रम और क्लीनिक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चार बच्चों को टेनेटॉमी (एक लघु शल्य प्रक्रिया) की गई तथा 9 बच्चों की कास्टिंग की गई।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. वीरेंद्र रघुवंशी, सिविल सर्जन ने क्लबफुट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक जन्मजात विकृति है जो पूर्णतः उपचार योग्य है। इसका इलाज 'पॉन्सिटी विधि' से किया जाता है, जो कि हर मंगलवार को जिला चिकित्सालय में उपलब्ध है। उपचार के तीन चरण होते हैं - कास्टिंग चरण: 4-8 सप्ताह तक बच्चे के पैर में प्लास्टर (कास्ट) चढ़ाकर पंजा धीरे-धीरे सीधा किया जाता है। टेनेटॉमी चरण: 10 मिनट की छोटी सी प्रक्रिया में अकड़े हुए टेंडन को काटकर पैर को लचीला बनाया जाता है। ब्रेसिंग चरण: 3 महीने तक दिन में 23 घंटे और इसके बाद रात में नियमित ब्रेस पहनाया जाता है।
डॉ. वीरेंद्र धाकड़, अस्थि रोग विशेषज्ञ ने बताया कि हर 800 से 1000 बच्चों में एक बच्चा क्लबफुट के साथ जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि कास्टिंग के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ आवश्यक हैं, जैसे: कास्टिंग को गीला न होने देना, लगातार रोने की स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना, पैर की अंगुलिया नीली या काली पड़ने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ,बच्चे को सावधानीपूर्वक उठाना ताकि कमर पर कास्ट का दबाव न पड़े, एवं नियमित फॉलोअप अवश्य कराना।
प्रबंधक, RBSK-DEIC गुना श्रीमती विनीता सोनी ने बताया कि जो बच्चे पूर्णतः स्वस्थ हो चुके हैं, उन्हें मंच पर लाकर नए मरीजों के अभिभावकों को प्रेरित किया गया, जिससे उनमें विश्वास और उत्साह का संचार हुआ।
कार्यक्रम में डॉ. आनंद शर्मा (RMO), डॉ. सूरज सिंह, दीपचंद सैनी (ऑडियोलॉजिस्ट), दीपक दुबे (सोशल वर्कर), प्रीति श्रीवास्तव (स्पेशल एजुकेटर) एवं मुरारी दांगी (प्रोग्राम एक्साक्यूटिव , अनुष्का फाउंडेशन) सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि क्लबफुट का उपचार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत DEIC के माध्यम से पूर्णतः नि:शुल्क किया जाता है।
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