गुना में गोपालपुरा डेम की पार बिना मुनादी तोड़ने पर बवाल, जलभराव और नुकसान पर प्रशासन से जवाब तलब
गुना (आरएनआई)। गोपालपुरा तालाब (डेम) की पार को जेसीबी मशीन से अचानक तोड़े जाने के फैसले ने शहर में नई बहस छेड़ दी है। बिना किसी सार्वजनिक मुनादी, पूर्व चेतावनी या आधिकारिक सूचना के तालाब की पार को तोड़ने का निर्णय आखिर किसने लिया? यह सवाल अब जनता से लेकर सामाजिक संगठनों तक में गूंज रहा है।
भगतसिंह कॉलोनी, न्यू सिटी कॉलोनी और एबी रोड क्षेत्र जैसे कई इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नागरिकों का मानना है कि यह स्थिति सीधे तौर पर डेम की पार को तोड़े जाने से जुड़ी है। क्षेत्र में लाखों की संपत्ति और घरेलू सामग्री को नुकसान पहुंचा है, परंतु अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस फैसले की जवाबदेही किस विभाग की है।
सूत्रों के अनुसार, तालाब की पार तोड़ने के पीछे कोई आपातकालीन तर्क दिया जा सकता है, लेकिन बिना मुनादी और बिना वैधानिक स्वीकृति के यह कार्य किस विभाग ने कराया? क्या नगरपालिका परिषद ने इसकी अनुमति दी थी या यह सिंचाई विभाग के स्वामित्व का मामला है?
प्रश्न यह भी उठता है कि क्या इस कार्य को करने से पहले संबंधित अधिकारियों ने रेस्क्यू, नुकसान-नियंत्रण या नागरिकों को सुरक्षित करने की कोई ठोस योजना बनाई थी? यदि नहीं, तो यह सीधे प्रशासन की लापरवाही मानी जाएगी।
शहर के बुद्धिजीवी, सामाजिक संस्थाएं और जागरूक नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि–
घटना की निष्पक्ष जांच हो,
आदेश जारी करने वाले अधिकारी का नाम सार्वजनिक किया जाए,
जलभराव और हानि की भरपाई की जाए,
और भविष्य में ऐसी कार्यवाहियों से पहले पारदर्शिता व जनसूचना का पालन सुनिश्चित हो।
reel बनाने वाले सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स से भी अपील की जा रही है कि इस गंभीर विषय को प्रचार के बजाय जनजागृति और जवाबदेही की दिशा में मोड़ा जाए।
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