गुना में अतिक्रमण हटाने की मुहिम पर उठे सवाल — वर्क प्लान की खामियों से निष्पक्षता पर संकट

Aug 21, 2025 - 15:54
Aug 21, 2025 - 15:56
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गुना में अतिक्रमण हटाने की मुहिम पर उठे सवाल — वर्क प्लान की खामियों से निष्पक्षता पर संकट

गुना (आरएनआई) गुना कलेक्टर केके कन्याल बेहद संजीदगी से काम कर रहे हैं। जनता का समर्थन भी मिल रहा है। 15 जेसीबी, 15 पोकलेन और 15 लाख रुपए जनसहयोग से जुटाए गए। सराहनीय कार्य है। लेकिन यदि उन्होंने समय रहते नदी नालों से अतिक्रमण हटाने की मुहीम के वर्क प्लान की खामियां दूर नहीं कराईं, तो इस अभियान की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे। 

अभी मुहिम को शुरू हुए तीन दिन ही हुए हैं लेकिन लोगों में चर्चा है कि भू माफिया को कोर्ट से स्टे लाने का समय देने की गरज से रियायत दी जा रही है। आरोप है कि भगतसिंह कॉलोनी से गुजरे नाले में बनी आरसीसी की दीवार को तोड़ने का प्रयास ही नहीं किया गया। बहाना बनाया गया कि बुलडोजर और पोकलेन से नहीं टूट रही। ऐसे ही वन विभाग ने भी लीपापोती की। यदि वन अमले द्वारा जीपीएस से वन सीमा नापी जाए तो बड़े पैमाने पर वनभूमि पर पक्का अतिक्रमण मिलना तय है। 

चर्चा है कि भू माफिया को एक वन अफसर का जातिभाई और कथित भांजा होने के साथ साथ राजस्व विभाग का पुराना करीबी होने का लाभ मिल रहा है। इस कारण दीवार तोड़े बिना मुहिम वहां से आगे बढ़ गई। एक मामले में एनजीटी ने गुना के जंगलों से अतिक्रमण हटाने का आदेश भी दिया है, दो तीन जगह अतिक्रमण हटाने का दिखावा करने के बाद वन विभाग ने एनजीटी के उस आदेश को भी  दबा दिया।

बीते रोज प्रशासन के जाने के बाद नाले में दीवार बनाने वाले भू माफिया ने वहां पहुंचकर लोगों को भरोसा दिलाया कि, कोर्ट से स्टे होने वाला है। सवाल ये है कि क्या कोई नेता, अफसर, माफिया भविष्य में बाढ़ पर स्टे ला सकेगा? नाले की सीमा पर टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के मुताबिक 9 मीटर (30 फुट) दूर तक पक्के निर्माण अवैध हैं, जिन्हें हटाने के लिए निकाय अथवा संबंधित विभाग सीधे सक्षम है। और यहां तो बीच नाले में दीवार खड़ी कर दी गई, जो नियमों के मुताबिक आज नहीं तो कल टूटेगी।

दरअसल, बड़ा झोल ये है कि कार्यवाही शुरू करने से पहले नदी नालों पर हुए अतिक्रमण के वास्तविक सीमा चिन्ह नहीं लगाए गए हैं। जिससे ये समझ में ही नहीं आ रहा कि नदी की सीमा कहां तक थी और उस पर कहां किस हद तक अतिक्रमण किया गया है। बिना सीमा ज्ञात किए नदी का कथित चौड़ीकरण शुरू कर दिया गया है, इसमें गहरीकरण पर जोर ज्यादा है। ऐसे में अभी से सवाल उठने लगे हैं।

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