गुना का सनसनीखेज मामला: रिश्वत, ठगी और प्रताड़ना के बीच युवक पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप

Sep 2, 2025 - 13:58
Sep 2, 2025 - 13:58
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गुना का सनसनीखेज मामला: रिश्वत, ठगी और प्रताड़ना के बीच युवक पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप

गुना (आरएनआई) धोखाधड़ी, ठगी, प्रताड़ना और कर्तव्य के प्रति लापरवाही की मिली जुली कहानी के बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर चंदन कैसे जला?  29 तारीख को 70 फीसदी झुलसी हालत में चाचौड़ा के ग्राम कुलम्बेह निवासी चंदन गुर्जर को चाचौड़ा से गुना, फिर गुना से भोपाल रैफर किया गया है, जहां वह इलाजरत है।

आरोप है कि उसे एक पुलिसकर्मी ने पेट्रोल डालकर जला दिया।
सूत्र बता रहे हैं कि इस कहानी की शुरुआत तब हुई जब कुछ माह पहले फतेहगढ़ क्षेत्र का एक आरोपी लंकेश पंडित और चाचौड़ा क्षेत्र का आरोपी मांगीलाल गुर्जर एनडीपीएस एक्ट के केस में जेल में बंद थे। इन दोनों की जेल में मुलाकात हुई। सूत्रों ने बताया कि लंकेश ने सस्ता सोना दिलाने की बात मांगीलाल से की। मांगीलाल जब जेल से छूटा तो उसने ये बात चंदन गुर्जर और अन्य लोगों को बताई। 

इसके बाद चार लोगों ने पैसे इकठ्ठा कर 20 तौला सोना करीब 6 लाख रुपए खर्च कर खरीद लिया। जब इस सोने की जांच कराई तो सोना नकली निकला। कुल मिलाकर जेल में हुई दो आरोपियों की दोस्ती ने एक और अपराध को जन्म दे दिया। सूत्रों के मुताबिक सारा लेनदेन दो नंबर में हुआ था, जिसका कोई लिखित प्रमाण नहीं था। ऐसे में ठगी का शिकार बने लोगों ने ठगों से पैसे वापस लेने के लिए फतेहगढ़ थाना पुलिस में सेटिंग करने की जुगाड़ लगाई।

सूत्रों ने बताया कि ठगी का शिकार बने लोग चाचौड़ा के थे उन्हें फतेहगढ़ पुलिस थाने में अपनी पहचान का कोई पुलिसवाला नहीं मिला। तब चंदन गुर्जर ने चाचौड़ा के ग्राम नेत्याखेड़ी के सुरेन्द्र भील से संपर्क किया। सुरेंद्र भील पुलिस मे आरक्षक चालक है और चाचौड़ा थाना परिसर के सरकारी क्वार्टर में रहता है। लंबे समय तक चाचौड़ा थाने में तैनात रहने से सुरेंद्र की पहचान इलाके में पुलिस से काम कराने की बनी हुई है। सुरेंद्र फिलहाल पुलिस लाईन गुना में तैनात है। लेकिन अपनी काबिलियत के चलते उसने अपनी ड्यूटी चाचौड़ा जेल वाहन पर बतौर ड्राइवर लगवा ली है। 

इधर जली हुई अवस्था में अस्पताल में भर्ती चंदन गुर्जर का सीधा आरोप है कि, "सुरेन्द्र भील ने मामला निपटाने के लिये 01 लाख रूपया रिश्वत के तौर पर लिया था। रूपया लेने के बाद भी उसने मामला खत्म नही कराया। फिर जब मैं उसके पास रूपया मांगने गया तो सुरेन्द्र भील ने मुझे मानसिक रूप से प्रताडित करना चालू कर दिया, मेरे से गाली गलौज, लड़ाई झगड़ा करने उतारू हो जाता और थाने में बन्द करने की धमकी देता। इस डर के कारण में मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। 

बकौल चंदन, मैं थाना प्रभारी के पास भी गया उनको पूरा किस्सा बताया तो उल्टा थाना प्रभारी द्वारा मुझे डांटा गया और डांटते हुए बोले कि साले तू ही बदमाश है, मुझे गालीया दीं एवं थाने मे बन्द करने की धमकी देने लगे। चंदन ने आगे बताया कि 29 अगस्त को मैं फिर अपना रूपया मांगने सुरेन्द्र भील के सरकारी क्वार्टर पर गया तो सुरेन्द्र भील ने मेरे उपर पेट्रोल डाल दिया और आग लगा दी जिससे मेरा शरीर जल गया। चंदन ने इस घटना की लिखित शिकायत भी की।

इसमें कोई दो राय नहीं कि चंदन गुर्जर जली अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब चंदन को जानबूझकर जलाया गया, वह दुर्घटनावश जल गया अथवा उसने खुद को जला लिया! ये जांच का बिंदु हो सकता है। लेकिन इस पूरे किस्से में हर स्तर पर बरती गई लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। इसमें भी कोई दो मत नहीं कि चंदन के साथ कुछ तो ऐसा जरूर हुआ है जिसके चलते नौबत यहां तक पहुंची। 

यदि उसके साथ ठगी हुई थी तो आरोपियों के विरुद्ध अपराध कायम किया जाना था। यदि किसी ने उससे पुलिस के नाम पर रिश्वत लेकर प्रताड़ना दी है और वह बार बार थाने जा रहा था तो रिश्वतखोर पर कार्यवाही होना थी। यदि उसे जलाया गया है तब भी एफआईआर होना थी। जिन जिम्मेदार लोगों ने ये मामला संज्ञान में आने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया और कोताही बरती है उनसे भी सवाल तो होना ही चाहिए।

ये किस्सा मैदानी पुलिस की उस कार्यप्रणाली का जीता जागता नमूना है, जो वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाए बगैर अपनाई जाती है। विगत कुछ सालों में मर्ग (संदिग्ध मौत आत्महत्या) के किस्सों में बढ़ोत्तरी हुई है। तमाम मर्ग के पीछे के असल किस्से अपराध में तब्दील नहीं होने के पीछे भी यही कार्यप्रणाली है। जिसमें थाना स्तर पर लापरवाही, लीपापोती और भ्रष्टाचार की भूमिका है। कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को खुद को यूं ही खत्म नहीं लेता, हर मौत के पीछे या आत्महत्या के प्रयास के पीछे कोई तो वजह जरूर होती है। वह वजह ढूंढना ही मैदानी अमले की ड्यूटी है। लेकिन, उम्मीद है जिले के शानदार पुलिस कप्तान इस किस्से में तो न्यायोचित कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे ही। साथ ही साथ जिले के विभिन्न थानों में संदिग्ध मौत, आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयास के मामलों को सतही तौर पर न लेने की व्यवस्था भी बनाएंगे।

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